Last Updated Jan - 31 - 2026, 03:30 PM | Source : Fela News
प्रेमानंद महाराज से सत्संग के दौरान एक व्यक्ति ने भूत-प्रेत और साधना को लेकर सवाल किया। महाराज के जवाब को आध्यात्मिक दृष्टि और मानसिक स्थिति से जोड़कर देखा जा रह
वृंदावन में चल रहे एक सत्संग के दौरान प्रेमानंद महाराज से जुड़ा एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इस क्लिप में एक व्यक्ति महाराज से कहता है कि वह भूतों का राजा बनना चाहता है और इसी से जुड़ा मार्ग पूछता है। सवाल असामान्य होने के कारण सत्संग में मौजूद लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इसके बाद प्रेमानंद महाराज के उत्तर को लेकर चर्चा तेज हो गई।
बताया जा रहा है कि प्रेमानंद महाराज ने इस प्रश्न को सीधे खारिज करते हुए व्यक्ति को भ्रम और भय से बाहर निकलने की सलाह दी। महाराज ने कहा कि भूत-प्रेत या किसी अदृश्य शक्ति का डर मन की कमजोरी से पैदा होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी इच्छाएं व्यक्ति को शांति नहीं, बल्कि मानसिक अशांति की ओर ले जाती हैं। प्रेमानंद महाराज के अनुसार, आत्मिक उन्नति का मार्ग भय, अंधविश्वास और असंतुलित सोच से होकर नहीं जाता।
इस दौरान प्रेमानंद महाराज ने नाम जप, साधना और संयमित जीवन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब मन ईश्वर के नाम में स्थिर होता है, तब किसी भी प्रकार के भय या नकारात्मक विचार स्वतः समाप्त हो जाते हैं। महाराज ने यह भी कहा कि भूत-प्रेत जैसी बातों में उलझना व्यक्ति को अपने वास्तविक लक्ष्य से भटका देता है। उनका मानना है कि मनुष्य को अपने भीतर के विकारों पर विजय पाने का प्रयास करना चाहिए, न कि काल्पनिक शक्तियों के पीछे भागना चाहिए।
वहीं दूसरी ओर, प्रेमानंद महाराज ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को भय, वहम या नकारात्मक अनुभूतियां लगातार परेशान कर रही हों, तो उसे आध्यात्मिक मार्गदर्शन के साथ-साथ चिकित्सकीय सलाह लेने से भी नहीं हिचकिचाना चाहिए। उन्होंने इसे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा विषय बताते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही।
इस बीच सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर कई तरह की व्याख्याएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे आध्यात्मिक शिक्षा के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ सवाल उठाए जा रहे हैं कि ऐसे प्रश्न सत्संग जैसे मंचों पर क्यों पूछे जाते हैं। हालांकि, प्रेमानंद महाराज के अनुयायियों का कहना है कि महाराज का उत्तर स्पष्ट, संयमित और व्यक्ति को सही दिशा दिखाने वाला था।
कुल मिलाकर, प्रेमानंद महाराज के इस जवाब को अंधविश्वास के बजाय आत्मिक शांति और मानसिक संतुलन पर केंद्रित संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जो मौजूदा समय में खासा प्रासंगिक माना जा रहा है।
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