Last Updated Apr - 18 - 2025, 04:05 PM | Source : Fela News
कपिल सिब्बल ने कहा कि उपराष्ट्रपति को पार्टी प्रवक्ता की तरह बयान नहीं देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट के फैसले को नोटबंदी न कहें, क्योंकि असल में वह मि
कपिल सिब्बल ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति को पार्टी प्रवक्ता की तरह नहीं बोलना चाहिए और उन्हें निष्पक्ष रहकर बात करनी चाहिए। सिब्बल ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति एक "टिट्यूलर हेड" होते हैं, जैसे गवर्नर का पद, और सुप्रीम कोर्ट को अनुच्छेद 142 के तहत पूर्ण अधिकार प्राप्त हैं।
उपराष्ट्रपति ने तमिलनाडु सरकार और राज्यपाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि कोर्ट का यह फैसला लोकतंत्र के खिलाफ है, क्योंकि न्यायपालिका कार्यपालिका या संसद के काम में दखल नहीं दे सकती।
सिब्बल ने उपराष्ट्रपति के इस बयान को गलत बताते हुए कहा कि अगर उपराष्ट्रपति को कोर्ट के फैसले पर आपत्ति है, तो वे रिव्यू याचिका डाल सकते हैं या सुप्रीम कोर्ट से सलाह ले सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि "मिसाइल नोटबंदी" थी, जो सरकार ने जनता पर लागू की थी, इसलिए कोर्ट के फैसले को "मिसाइल" कहना गलत है।
सिब्बल ने यह भी सवाल उठाया कि दिल्ली हाईकोर्ट के जज के घर से बरामद भारी मात्रा में पैसे के मामले में FIR क्यों नहीं हुई और इस पर उपराष्ट्रपति से जानकारी मांगी। उन्होंने कहा, "अगर कार्यपालिका काम नहीं करेगी, तो न्यायपालिका दखल देगी," और कई मामलों का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति से सवाल किया कि जब कुछ जजों पर आरोप लगे, तो क्यों उन्होंने तब कार्रवाई नहीं की।
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