Header Image

“प्यास बुझाई लेकिन सज़ा मिली”: कुणो नेशनल पार्क में चीता परिवार को पानी पिलाने वाले ड्राइवर को निलंबन, सोशल मीडिया पर उठे सवाल

“प्यास बुझाई लेकिन सज़ा मिली”: कुणो नेशनल पार्क में चीता परिवार को पानी पिलाने वाले ड्राइवर को निलंबन, सोशल मीडिया पर उठे सवाल

Last Updated Apr - 09 - 2025, 01:16 PM | Source : Fela News

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में देखा गया कि मध्य प्रदेश के कुणो नेशनल पार्क में तैनात वन विभाग के ड्राइवर सत्यनारायण गुर्जर ने 'ज्वाला' और उसके चीता परिव
“प्यास बुझाई लेकिन सज़ा मिली”: कुणो नेशनल पार्क में चीता परिवार को पानी पिलाने वाले ड्राइवर को निलंबन, सोशल मीडिया पर उठे सवाल
“प्यास बुझाई लेकिन सज़ा मिली”: कुणो नेशनल पार्क में चीता परिवार को पानी पिलाने वाले ड्राइवर को निलंबन, सोशल मीडिया पर उठे सवाल

वायरल वीडियो ने दिल जीता

वीडियो में ड्राइवर गुर्जर एक स्टील की प्लेट में पानी डालते नजर आ रहे हैं, जबकि पास में ज्वाला और उसके दो शावक आराम कर रहे हैं। जैसे ही पानी भरा जाता है, चीतों का परिवार धीरे-धीरे आगे बढ़ता है और प्यास बुझाता है। यह नज़ारा इतना शांत और भावुक था कि लाखों लोगों ने सोशल मीडिया पर इस ड्राइवर की तारीफ की।

लेकिन हो गया उल्टा

जहां लोगों ने इसे इंसानियत का उदाहरण बताया, वहीं वन विभाग ने इसे गंभीर उल्लंघन माना। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मानवीय संपर्क से जंगली जानवर इंसानों के ज्यादा करीब आने लगते हैं, जिससे वे रिहायशी इलाकों की तरफ भी भटक सकते हैं। इसी वजह से सत्यनारायण गुर्जर को निलंबित कर दिया गया।


सवालों में वन विभाग की सख्ती

निलंबन की खबर के बाद इंटरनेट पर लोगों ने वन विभाग की सख्ती पर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा – “किसी जानवर की मदद करना अगर गलती है तो इंसानियत कहां बचेगी?” कई लोगों ने कहा कि ड्राइवर ने जानवर की जान बचाने के लिए जो किया, वह सज़ा नहीं, सम्मान का हकदार है।


संतुलन की ज़रूरत

वन विभाग का तर्क भी महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर जंगली जानवर इंसानों से डरना छोड़ दें तो दोनों पक्षों के लिए खतरा बढ़ सकता है। लेकिन ऐसी घटनाओं को न सिर्फ सज़ा की दृष्टि से, बल्कि जागरूकता और बेहतर प्रबंधन के रूप में भी देखना ज़रूरी है।
क्या है आगे का रास्ता?

इस घटना ने इंसान और जानवर के रिश्ते पर एक नई बहस छेड़ दी है—क्या हर मानवीय भाव से प्रेरित कार्य को नियमों की कसौटी पर सज़ा मिलनी चाहिए, या ऐसे मामलों में सहानुभूति और संतुलन की सोच जरूरी है?

आप क्या सोचते हैं? क्या सत्यनारायण को सज़ा मिलनी चाहिए थी या सम्मान?

Share :

Trending this week

SIR पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर

May - 27 - 2026

बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर स... Read More

डिजिटल करेंसी से राशन माफियाओं पर वार

May - 27 - 2026

दिल्ली में सरकारी राशन की चोरी, जमाखोरी और कालाबाजारी प... Read More

आसाराम को हाई कोर्ट से झटका

May - 27 - 2026

रेप केस में दोषी आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट से बड़ा झट... Read More