Last Updated Apr - 12 - 2025, 03:13 PM | Source : Fela News
राहुल गांधी ने वादा किया कि अगर उनकी सरकार बनी, तो आरक्षण की 50% सीमा खत्म कर दी जाएगी। उन्होंने कहा – "हम 50% की दीवार को तोड़ेंगे और तेलंगाना मॉडल पूरे देश मे
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को अहमदाबाद में आयोजित कांग्रेस सत्र के दौरान एक ऐसा बयान दिया है, जो देश की शैक्षणिक और सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्रणाली को पूरी तरह से बदल सकता है। उन्होंने ऐलान किया कि कांग्रेस पार्टी SC, ST और OBC के लिए आरक्षण की 50% सीमा को हटाने की योजना पर काम कर रही है।
तेलंगाना मॉडल को बताया देश के लिए मिसाल
राहुल गांधी ने तेलंगाना सरकार के हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि वहां Backward Classes (BCs) के लिए आरक्षण 42% तक बढ़ा दिया गया है, जिससे राज्य में कुल आरक्षण सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 50% की सीमा से अधिक हो गया है।
“तेलंगाना ने क्रांतिकारी कदम उठाया है और देश को रास्ता दिखाया है,” गांधी ने कहा। उन्होंने इस मॉडल को पूरे भारत में लागू करने का वादा किया और कहा कि यह सिर्फ दिल्ली की बात नहीं, बल्कि देशभर के हर कोने की मांग है।
मंडल आयोग की सीमा को बताया ‘कृत्रिम बाधा’
1992 में सुप्रीम कोर्ट ने मंडल आयोग के तहत दिए गए फैसले में आरक्षण की सीमा 50% तय की थी। राहुल गांधी ने इस सीमा को "कृत्रिम दीवार" बताया और कहा कि यह भारत के वंचित समुदायों को संसाधनों तक समान पहुंच से वंचित करता है।
उन्होंने संसद में पीएम मोदी से कहा था:
“अगर आप इस कृत्रिम 50 प्रतिशत की सीमा को नहीं तोड़ेंगे, तो हम उसे तोड़ेंगे, गिराएंगे और फेंक देंगे।”
सामाजिक प्रतिनिधित्व को बताया राष्ट्रीय ज़रूरत
राहुल गांधी ने तेलंगाना की सामाजिक संरचना का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की आबादी में OBC, EBC, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक बड़ी संख्या में हैं—और यही भारत की असली तस्वीर है। उन्होंने दावा किया कि इन समुदायों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
बीजेपी पर तीखा हमला
राहुल गांधी ने बीजेपी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी का "एंटी-दलित माइंडसेट" देश के सामने स्पष्ट है। उन्होंने राजस्थान की एक घटना का ज़िक्र किया, जहां एक पूर्व बीजेपी विधायक ने गंगा जल से मंदिर को शुद्ध किया क्योंकि वहां एक दलित नेता ने पूजा में हिस्सा लिया था।
राहुल गांधी का यह ऐलान ना सिर्फ राजनीतिक रूप से बड़ा है, बल्कि यह भारत की आरक्षण व्यवस्था पर एक ऐतिहासिक बहस को फिर से ज़िंदा करता है। अब देखने वाली बात होगी कि आने वाले लोकसभा चुनाव 2024 में यह मुद्दा कैसे गर्माता है, और क्या कांग्रेस अपने इस वादे को हकीकत में बदल पाएगी?
क्या अब सचमुच टूटेगी आरक्षण की 50% दीवार?
ये सवाल आने वाले महीनों में राजनीति और समाज दोनों के केंद्र में रहेगा