Last Updated Mar - 21 - 2025, 04:51 PM | Source : Fela News
कांग्रेस ने अब दिल्ली मॉडल अपनाकर चुनावी राजनीति में आगे बढ़ने का फैसला किया है। फिलहाल, यह उसे नुकसान पहुंचा सकता है और बीजेपी को फायदा हो सकता है, लेकिन भविष्
कांग्रेस ने अब दिल्ली मॉडल अपनाकर चुनावी राजनीति में आगे बढ़ने का फैसला किया है। शुरुआत हरियाणा से हुई थी, लेकिन महाराष्ट्र और झारखंड चुनावों के कारण राहुल गांधी को पूरी तरह प्रयोग करने का मौका नहीं मिला। दिल्ली चुनाव में उन्होंने खुलकर रणनीति अपनाई, जिससे भले ही कांग्रेस को सीटें न मिली हों, लेकिन पार्टी को आगे के लिए फायदा हुआ। अब कांग्रेस इसी रणनीति को अन्य राज्यों में लागू करना चाहती है, भले ही इसके लिए उसे कुछ नुकसान भी झेलना पड़े।
बिहार से लेकर बंगाल तक एक ही रणनीति
बिहार, बंगाल, केरल और पंजाब जैसे राज्यों में कांग्रेस एक तय योजना पर काम कर रही है। इन राज्यों में कांग्रेस नेताओं की बैठकें होती हैं, जिनमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और स्थानीय नेता शामिल होते हैं। उन्हें चुनावी रणनीति के बारे में समझाया जाता है और साफ निर्देश दिए जाते हैं कि कांग्रेस अब किसी भी दल के लिए अपनी चुनावी स्थिति से समझौता नहीं करेगी।
उदाहरण के लिए, बंगाल कांग्रेस नेताओं को ममता बनर्जी सरकार की नीतियों की खुलकर आलोचना करने की हरी झंडी दी गई है। यही रणनीति बिहार में भी अपनाई जा रही है, जहां कांग्रेस आरजेडी के खिलाफ भी आक्रामक रुख अपना रही है।
बिहार में कांग्रेस की रणनीति
बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने पद संभालते ही काम शुरू कर दिया था। उनके साथ कन्हैया कुमार और पप्पू यादव भी मैदान में उतर चुके हैं, और अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार को भी मोर्चे पर लगाया गया है।
कांग्रेस की योजना बिहार में आरजेडी के खिलाफ वैसी ही रणनीति अपनाने की है जैसी दिल्ली में आम आदमी पार्टी के खिलाफ अपनाई गई थी। दिलचस्प बात यह है कि समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने भी बिहार में कांग्रेस के खिलाफ जाने की घोषणा कर दी है, जिससे कांग्रेस के लिए चुनौती और बढ़ गई है।
मुस्लिम वोट बैंक और कांग्रेस की स्थिति
बिहार में कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत उसका मुस्लिम वोट बैंक है। हालांकि, आरजेडी का इस वोट पर दावा है, लेकिन सीमांचल क्षेत्र में कांग्रेस की पकड़ मजबूत मानी जाती है। साथ ही, कांग्रेस को किसी विशेष जाति की पार्टी नहीं माना जाता, जो उसकी एक बड़ी मजबूती है।
अब तक कांग्रेस लालू यादव के समर्थन में रही थी और संगठन भी बिखरा हुआ था, लेकिन अब वह स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। राहुल गांधी ने बिहार दौरे के दौरान जातिगत गणना को फर्जी करार देकर आरजेडी के सामने अपना इरादा जाहिर कर दिया था।
क्षेत्रीय दलों के लिए कांग्रेस का साफ संदेश
राहुल गांधी ने पहले ही साफ कर दिया है कि क्षेत्रीय दलों के पास कांग्रेस जैसी कोई विचारधारा नहीं है, इसलिए उन्हें कांग्रेस के साथ चलना होगा, और वह भी पीछे रहकर। नहीं तो कांग्रेस अकेले अपना रास्ता तय करेगी।
कुल मिलाकर, कांग्रेस अब सिर्फ बीजेपी से ही नहीं बल्कि उन सभी क्षेत्रीय दलों से भी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है, जो उसके वोट बैंक को कमजोर कर रहे हैं।