Last Updated Jun - 09 - 2026, 12:43 PM | Source : Fela news
दिल्ली के सैद-उल-अजैब में 30 मई को पांच मंजिला अवैध इमारत ढहने से 6 लोगों की मौत और 14 घायल हुए थे, जिसके बाद तत्काल सुनवाई की मांग की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (8 जून 2026) को दिल्ली नगर निगम (MCD) से जुड़े अवैध और अनधिकृत निर्माणों पर दाखिल स्टेटस रिपोर्ट के मामले में तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया. एमिकस क्यूरी की ओर से दाखिल रिपोर्ट में राष्ट्रीय राजधानी में अवैध निर्माणों पर सर्वे और कार्रवाई का विस्तृत हलफनामा मांगा गया था.
यह मामला दिल्ली के सैद-उल-अजैब इलाके में 30 मई को हुई उस दर्दनाक घटना से जुड़ा है, जिसमें पांच मंजिला अवैध इमारत गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई और 14 लोग घायल हुए थे. हादसे के बाद अदालत में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई थी.
“उल्लेख अस्वीकार किया जाता है”, SC का आदेश
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने स्पष्ट कहा, “उल्लेख अस्वीकार किया जाता है. कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है.” कोर्ट ने कहा कि चूंकि मामले की आंशिक सुनवाई जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ कर चुकी है, इसलिए वही आगे सुनवाई करे.
एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में क्या दावा?
सीनियर एडवोकेट और एमिकस क्यूरी अजीत सिन्हा ने कोर्ट में दलील दी कि MCD ने बार-बार शिकायतों और उल्लंघनों के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं की. रिपोर्ट में बताया गया कि सैद-उल-अजैब की इमारत के खिलाफ 2012 और 2015 में भी उल्लंघन दर्ज हुआ था, लेकिन निर्माण जारी रहा.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो इस बड़े हादसे को टाला जा सकता था.
देशभर के अवैध निर्माणों पर सख्ती की मांग
एमिकस क्यूरी ने कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि MCD को पूरे दिल्ली में अवैध निर्माणों और भवनों के अनधिकृत उपयोग पर सर्वे रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए. साथ ही सभी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने और अवैध ढांचों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई.
सरकार और पुलिस से भी जवाब तलब की मांग
रिपोर्ट में दिल्ली सरकार और पुलिस से भी हादसे पर की गई कार्रवाई और पीड़ितों को मुआवजे की स्थिति पर जवाब दाखिल करने का अनुरोध किया गया है.
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