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'द वायर' के पत्रकार पर गंभीर आरोप, पीड़िता ने कहा- 'डर थी कि कहीं हिंदुत्वियों को मुद्दा न मिल जाए'

'द वायर' के पत्रकार पर गंभीर आरोप, पीड़िता ने कहा- 'डर थी कि कहीं हिंदुत्वियों को मुद्दा न मिल जाए'

Last Updated May - 29 - 2025, 12:17 PM | Source : Fela News

एक महिला ने सोशल मीडिया पर खुलासा किया कि 'द वायर' के पत्रकार ओमर राशिद ने उनके साथ शोषण, दुष्कर्म और जबरन बीफ खिलाने जैसे गंभीर अपराध किए।
'द वायर' के पत्रकार पर गंभीर आरोप
'द वायर' के पत्रकार पर गंभीर आरोप

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक अनाम इंस्टाग्राम पोस्ट ने पत्रकारिता जगत में हलचल मचा दी है। पोस्ट में एक महिला ने दावा किया है कि प्रतिष्ठित न्यूज़ पोर्टल 'द वायर' से जुड़े पत्रकार ओमर राशिद ने उनके साथ कई बार शारीरिक शोषण, मारपीट और बलात्कार किया। साथ ही पीड़िता का यह भी आरोप है कि उसे जबरन बीफ खिलाया गया।

इस पूरे मामले में अब तक तथाकथित 'स्वतंत्र और निडर' मीडिया की तरफ से कोई बड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वही मीडिया जो आमतौर पर ऐसे मामलों पर जमकर आवाज़ उठाती है, इस बार या तो चुप है या फिर केवल औपचारिक ट्वीट्स तक सीमित रह गई है।

सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र्स ने सवाल उठाया है कि अगर इस मामले में आरोपी कोई हिंदू होता और पीड़िता किसी अल्पसंख्यक समुदाय से होती, तो क्या अंतरराष्ट्रीय मीडिया इसे संयुक्त राष्ट्र स्तर का मुद्दा न बना देती? ऐसे में ये दोहरा रवैया भी जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

इस पोस्ट में सबसे चौंकाने वाला हिस्सा ये नहीं था कि एक महिला का शोषण हुआ – दुखद रूप से, ऐसे मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। असली हैरानी की बात ये है कि पीड़िता ने खुद यह स्वीकार किया कि उसने इतने लंबे समय तक चुप्पी इसलिए साधी क्योंकि उसे डर था कि कहीं "हिंदुत्ववादी ताकतों" को इस मामले को हथियार बनाने का मौका न मिल जाए।

इस सोच पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। आखिरकार, जब एक महिला अत्याचार झेल रही हो, तब सबसे पहले न्याय और इंसानियत की बात होनी चाहिए, न कि राजनीतिक समीकरणों की। इस मानसिकता को एक पुरानी कहानी 'एकचक्रा' से जोड़ा जा रहा है – जहां गाँववाले एक राक्षस को शांत रखने के लिए हर महीने एक आदमी और भोजन भेजते थे। वे शक्तिहीन थे, इसलिए झुकना पड़ा।

लेकिन आज की तथाकथित प्रगतिशील, शिक्षित, सोशल मीडिया पर सक्रिय, अंग्रेज़ी बोलने वाली महिलाओं को किस चीज़ ने रोका? क्या राजनीतिक विचारधारा इंसाफ़ से बड़ी हो गई है?

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर गर्म है, लेकिन मुख्यधारा मीडिया में इस पर अभी तक सन्नाटा है। देखने वाली बात होगी कि क्या अब भी कोई निष्पक्ष जांच या रिपोर्टिंग होगी, या यह मामला भी दूसरे विवादित मामलों की तरह धीरे-धीरे दबा दिया जाएगा।

 

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