Last Updated Jan - 30 - 2026, 03:05 PM | Source : DF
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर सरकार को 40 दिन का समय दिया। उनके बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चाएं तेज हुई ह
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ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि वे अपने प्रमुख आग्रहों को लेकर सरकार को 40 दिन का समय दे रहे हैं। उनके इस बयान के बाद धार्मिक संगठनों और राजनीतिक दलों के बीच प्रतिक्रिया का दौर शुरू हो गया है। शंकराचार्य ने अपने संबोधन में हिंदू पहचान और उससे जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर भी स्पष्ट टिप्पणी की।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हिंदू होने की पहली शर्त अपने धर्म और परंपराओं के प्रति स्पष्ट आस्था और व्यवहार में उसका पालन करना है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल नाम या पहचान से नहीं, बल्कि आचरण से हिंदू होने की भावना प्रकट होती है। उनके अनुसार, समाज और सरकार दोनों की यह जिम्मेदारी है कि वे धार्मिक मूल्यों और परंपराओं की रक्षा सुनिश्चित करें।
इस दौरान उन्होंने कुछ नीतिगत और सामाजिक मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय से इन पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। शंकराचार्य के बयान के बाद सवाल उठाए जा रहे हैं कि सरकार उनके द्वारा तय की गई समय-सीमा के भीतर किसी तरह का आश्वासन या कदम उठाती है या नहीं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि 40 दिन की अवधि पूरी होने के बाद अगला कदम क्या होगा।
इस बीच, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शंकराचार्य के बयान को केवल धार्मिक टिप्पणी के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसके संभावित सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों पर भी चर्चा हो रही है। सूत्रों के अनुसार, कुछ धार्मिक संगठनों ने उनके रुख का समर्थन किया है, जबकि अन्य समूहों का मानना है कि इस तरह की समय-सीमा तय करने से अनावश्यक दबाव की स्थिति बन सकती है।
वहीं दूसरी ओर, सरकार की तरफ से इस बयान पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन का कहना है कि सभी संवैधानिक और सामाजिक मुद्दों पर तय प्रक्रिया के तहत विचार किया जाता है और किसी भी सुझाव या मांग को उसी दायरे में देखा जाएगा।
बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में शंकराचार्य के बयान को लेकर और स्पष्टता सामने आ सकती है। फिलहाल, उनके 40 दिन के अल्टीमेटम और हिंदू होने की परिभाषा को लेकर दी गई टिप्पणी ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिस पर नजरें बनी हुई हैं।
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