Last Updated Jan - 31 - 2026, 04:17 PM | Source : Fela News
महाराष्ट्र में सुनेत्रा पवार के डिप्टी मुख्यमंत्री बनने की अटकलों के बीच शरद पवार ने अनभिज्ञता जताई और एनसीपी के संभावित विलय पर भी खुलकर बयान दिया।
महाराष्ट्र की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब सुनेत्रा पवार के डिप्टी मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं सामने आईं। इस पूरे घटनाक्रम पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद पवार की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। मीडिया से बातचीत में शरद पवार ने साफ कहा कि उन्हें इस तरह के किसी फैसले की जानकारी नहीं है और उन्होंने इस मुद्दे पर किसी से कोई चर्चा नहीं की है।
सूत्रों के अनुसार, अजित पवार गुट की ओर से संगठनात्मक और सत्ता स्तर पर कुछ अहम बदलावों को लेकर आंतरिक बातचीत चल रही है। इसी कड़ी में सुनेत्रा पवार के नाम को लेकर चर्चाएं शुरू हुईं, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, शरद पवार ने यह स्पष्ट किया कि पार्टी से जुड़े बड़े फैसले सामूहिक विचार-विमर्श से लिए जाते हैं और उन्हें दरकिनार कर कोई महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया हो, ऐसी जानकारी उनके पास नहीं है।
इस बीच, शरद पवार ने दोनों एनसीपी गुटों के संभावित विलय को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि एनसीपी के दोनों धड़ों के एक होने को लेकर फिलहाल कोई ठोस बातचीत नहीं चल रही है। उनका कहना था कि पार्टी के भविष्य और दिशा को लेकर निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिए जा सकते और इसके लिए संगठन के भीतर व्यापक सहमति जरूरी है। शरद पवार के इस बयान को अजित पवार गुट की रणनीति से अलग रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर, अजित पवार खेमे से जुड़े नेताओं का कहना है कि सरकार और पार्टी के स्तर पर सभी विकल्प खुले हैं। उनका तर्क है कि राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार फैसले लिए जाते हैं और नेतृत्व से जुड़े बदलाव भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। हालांकि, सुनेत्रा पवार को लेकर चल रही अटकलों पर इस गुट की ओर से भी अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शरद पवार की प्रतिक्रिया से यह संकेत मिलता है कि एनसीपी के भीतर मतभेद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। सवाल उठाए जा रहे हैं कि यदि दोनों गुटों में संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो नेतृत्व और सत्ता में भागीदारी को लेकर किस तरह का संतुलन बनाया जाएगा।
प्रशासन का कहना है कि डिप्टी मुख्यमंत्री पद या मंत्रिमंडल में किसी भी तरह का बदलाव पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही होता है। फिलहाल, महाराष्ट्र की राजनीति में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और स्पष्टता सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
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