Header Image

JNU में नारेबाजी तेज, शरजील उमर समर्थन और सरकार विरोधी प्रदर्शन।

JNU में नारेबाजी तेज, शरजील उमर समर्थन और सरकार विरोधी प्रदर्शन।

Last Updated Jan - 06 - 2026, 02:43 PM | Source : Fela News

जेएनयू परिसर में छात्र संगठनों ने शरजील इमाम और उमर खालिद की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया, 5 जनवरी 2020 हिंसा की बरसी पर केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगे।
JNU में नारेबाजी तेज
JNU में नारेबाजी तेज

दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर छात्र आंदोलनों और राजनीतिक नारों को लेकर चर्चा में आ गया है। पांच जनवरी की रात जेएनयू छात्र संघ ( JNUSU) और वामपंथी छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान जेएनयू परिसर में नारेबाजी हुई, जिसमें शरजील इमाम और उमर खालिद के समर्थन में आवाजें बुलंद की गईं।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने दोनों की रिहाई की मांग करते हुए उन्हें “राजनीतिक बंदी” बताया। छात्रों का कहना था कि विचारधारा के आधार पर गिरफ्तारी लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है। इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ तीखे नारे भी लगाए, जिनमें प्रधानमंत्री Narendra Modi और गृह मंत्री Amit Shah का नाम लेकर नारे शामिल थे। इन नारों को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

यह प्रदर्शन 5 जनवरी 2020 को जेएनयू परिसर में हुई हिंसा की से भी जुड़ा था। छह साल पहले इसी दिन नकाब पोश हमलावरों ने छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया था, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। इस घटना की बरसी पर जेएनयू शिक्षक संघ और छात्र संघ ने साबरमती हॉस्टल के पास 'गुरिल्ला ढाबा' लगाकर विरोध दर्ज कराया। आयोजकों ने इस दिन को "क्रूर हमले" की बरसी बताते हुए न्याय की मांग दोहराई।

प्रदर्शनकारियों का सवाल था कि छह साल बीत जाने के बावजूद जेएनयू हिंसा के आरोपियों की पहचान क्यों नहीं हो पाई और अब तक किसी को सजा क्यों नहीं मिली। छात्रों का आरोप है कि जांच प्रक्रिया में देरी हुई और पीड़ितों को न्याय नहीं मिला। इसी नाराजगी के चलते विरोध प्रदर्शन को और तेज किया गया।

वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कहा गया कि परिसर में शांति बनाए रखना प्राथमिकता है और कानून-व्यवस्था से जुड़ा कोई भी मामला संबंधित एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में आता है। पुलिस की ओर से स्थिति पर नजर रखी गई, हालांकि किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली ।

कुल मिलाकर, जेएनयू में यह प्रदर्शन एक बार फिर यह दिखाता है कि विश्वविद्यालय देश की राजनीति और वैचारिक बहसों का केंद्र बना हुआ है। शरजील इमाम और उमर खालिद की रिहाई की मांग, 2020 की हिंसा की बरसी और सरकार विरोधी नारों ने इस मुद्दे को दोबारा राष्ट्रीय बहस में ला खड़ा किया है।

Share :

Trending this week

CJP चीफ का बयान वायरल

Jun - 12 - 2026

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के राज्यसभा सांसद स... Read More

TMC के 19 सांसदों ने स्पीकर को लिखी चिट्ठी

Jun - 12 - 2026

ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत की चर्चाओं के बीच सामने आई 19 ट... Read More

'370 रुपये बिरयानी' विवाद बढ़ा

Jun - 12 - 2026

370 Rupees Biryani Controversy:गुरुग्राम के चर्चित ‘370 रुपये बिरयानी’ वि... Read More