Last Updated Jan - 07 - 2026, 04:49 PM | Source : Fela News
सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने नेहरू पर गंभीर आरोप लगाए। ऐतिहासिक दस्तावेजों के हवाले से कई दावे सामने रखे गए।
सोमनाथ मंदिर को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। ज्योतिर्लिंग सोमनाथ पर हुए ऐतिहासिक हमले के 1000 साल पूरे होने के मौके पर भारतीय जनता पार्टी ने देश के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru पर बड़ा आरोप लगाया है। भाजपा सांसद Sudhanshu Trivedi ने दावा किया है कि नेहरू सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के पक्ष में नहीं थे और उन्होंने इसे लेकर कई तथ्यों और दस्तावेजों का हवाला भी दिया है।
सुधांशु त्रिवेदी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि सन 1026 में सोमनाथ मंदिर पर पहला हमला हुआ था और इसके बाद कई बार इस पवित्र स्थल को नष्ट करने की कोशिश की गई। बावजूद इसके, सोमनाथ मंदिर आज भी अडिग खड़ा है और भारतीय सभ्यता की निरंतरता का प्रतीक बना हुआ है।
भाजपा सांसद का आरोप है कि आजादी के बाद जब सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की पहल की जा रही थी, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस प्रक्रिया से दूरी बनाए हुए थे । त्रिवेदी के अनुसार, उपलब्ध ऐतिहासिक पत्राचार और सरकारी रिकॉर्ड यह संकेत देते हैं कि नेहरू इस धार्मिक पुनर्निर्माण को सरकारी समर्थन देने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन में हिस्सा लिया था, जबकि नेहरू ने इससे असहमति जताई थी।
भाजपा का कहना है कि यह मुद्दा केवल मंदिर निर्माण का नहीं, बल्कि उस दौर की सोच और दृष्टिकोण को समझने का है। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि उस समय की सरकार ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को अपेक्षित सम्मान नहीं दिया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज की सरकार इस विरासत को पुनर्जीवित करने और सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस पूरे विवाद के बीच यह भी अहम है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi 11 जनवरी को गुजरात स्थित Somnath Temple में आयोजित 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' में शामिल होने वाले हैं। इसे सोमनाथ मंदिर पर हमले के 1000 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोमनाथ मंदिर का मुद्दा एक बार फिर इतिहास, धर्म और राजनीति के संगम पर खड़ा है। जहां भाजपा इसे सांस्कृतिक स्वाभिमान से जोड़कर देख रही है, वहीं विपक्ष इसे इतिहास को राजनीतिक नजरिये से पेश करने की कोशिश बता सकता है। आने वाले दिनों में इस बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।