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सुप्रीम कोर्ट ने अमटेक फ्रॉड केस में पूर्व चेयरमैन अरविंद धम को नहीं दी अंतरिम जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने अमटेक फ्रॉड केस में पूर्व चेयरमैन अरविंद धम को नहीं दी अंतरिम जमानत

Last Updated Jun - 17 - 2025, 12:24 PM | Source : Fela News

₹2,700 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद धम की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी, उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करने के लिए न्यायिक हिर
सुप्रीम कोर्ट ने अमटेक फ्रॉड केस में पूर्व चेयरमैन अरविंद धम को नहीं दी अंतरिम जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने अमटेक फ्रॉड केस में पूर्व चेयरमैन अरविंद धम को नहीं दी अंतरिम जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अमटेक ग्रुप के पूर्व अध्यक्ष अरविंद धम की अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। धम पर ₹2,700 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी और धनशोधन के गंभीर आरोप हैं  ।याचिका में धम ने स्वास्थ्य संबंधी आधार पर जमानत की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे खारिज करते हुए कहा कि हाल ही में उनका एंजियोग्राफी टेस्ट किया जा चुका है और पुनः मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत देना उचित नहीं  ।

कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में रहकर परीक्षण करवाने का सुझाव दिया और कहा कि अगर ऑपरेशन की आवश्यकता होगी तो वह बाद में जमानत के लिए फिर आवेदन कर सकते हैं  ।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही अप्रैल में धम को सुबह 10 बजे तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दे रखा था और इसी का पालन जारी रखने को भी कहा  ।

 जांच की मौजूदा स्थिति:

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुरू में ₹550 करोड़ की परिसंपत्तियाँ जब्त की थीं; इसमें समूह की कंपनियों से संबंधित कई संपत्तियाँ शामिल थीं  ।

ED ने पिछले साल जुलाई में उन्हें गिरफ्तार किया था और सितंबर में आरोपपत्र दाखिल किया गया  ।

जांच में सामने आया है कि अमटेक ग्रुप की वित्तीय रिपोर्टों में जानबूझकर हेराफेरी की गई; कई बैंक कर्ज चूक गए और बैंकों को 80% तक नुकसान उठाना पड़ा  ।

जांच एक सामान्य बैंक धोखाधड़ी से बढ़कर धनशोधन मामले में तब्दील हो गई, जिसमें CBI की शिकायतों को भी ED ने आधार बनाया  ।

अब आगे क्या होने की संभावना है?

धम की नियमित जमानत याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है, जहाँ अगले महीने सुनवाई होने की संभावना है  ।

ED की जब्ती की प्रक्रिया जारी रहेगी और अदालत के आदेशों के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी।

मेडिकल रिपोर्ट और कोर्ट के निर्देशों के आधार पर धम भविष्य में ऑपरेशन की ज़रूरत साबित होने पर फिर से जमानत मांग सकते हैं।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रुख लेते हुए कहा कि स्वास्थ्य संबंधी आधार पर बार-बार देरी नहीं दी जा सकती। अब यह मामला न्याय की प्रक्रिया में न्यायालय और जांच एजेंसियों के बीच आगे बढ़ेगा और संपत्ति की जब्ती एवं आरोपों पर अदालत की अंतिम सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी होंगी।

 

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