Last Updated Jun - 14 - 2025, 10:26 AM | Source : Fela News
सुरक्षा कवरेज का निर्णय राज्य सरकारों का कार्य होता है, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया
सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कह दिया कि उद्योगपति मुकेश अंबानी और उनके परिवार को दी गई Z+ सुरक्षा का निर्णय राज्य सरकारों के विभायज्ञ स्तर के मूल्यांकन पर आधारित है और इसका न्यायालय द्वारा पुनः निरुपण नहीं किया जा सकता ।
याचिकाकर्ता बिकाश साहा ने Z+ सुरक्षा को हटाने या समीक्षा करने की मांग की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य—केंद्र व महाराष्ट्र सरकार—खतरे की वास्तविकता की समीक्षा कर सुरक्षा स्तर तय करें, और इसमें न्यायपालिका का हस्तक्षेप उचित नहीं ।
न्यायमूर्ति मन्मोहन की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता को चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी फंसावट याचिकाएं दायर करने पर “उल्लेखनीय आर्थिक जुर्माना” लगाया जा सकता है । कोर्ट ने यह भी कहा कि साहा ने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया जो सुरक्षा आवे껺 की तर्कसंगतता पर सवाल उठाता हो
मुख्य बिंदु:
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उच्च सुरक्षा कवरेज की आवश्यकता—चाहे राजनीतिक व्यक्ति हो या कारोबार से जुड़े प्रमुख—खतरे के आधार पर राज्य व केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है और न्यायपालिका इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अम्बानी परिवार की Z+ सुरक्षा की वैधानिकता को पुन: पुष्ट किया और कहा कि ऐसी रिक्त्ताएं बिना ठोस कारण पर पुनर्विचार योग्य नहीं हैं।