Last Updated Jul - 17 - 2025, 12:55 PM | Source : Fela News
सुप्रीम कोर्ट ने कमेडियन पर उठाये अपराधियों की टिप्पणियों को अस्वीकार करते हुए Article 21 को Article 19 से ऊपर रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यह स्पष्ट किया कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Article 19) की तुलना में मानव गरिमा (Article 21) अधिक महत्वपूर्ण है। यह निर्णय पांच स्टैंड-अप कमेडियनों के खिलाफ की गयी शिकायतों पर आया, जो विकलांग व्यक्तियों पर ‘अनुचित मज़ाक’ करने के आरोप में थे ।
कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की मानव गरिमा के प्रति जिम्मेदारी होनी चाहिए और हास्य किसी के सम्मान को नुकसान पहुंचाए तो वह संवैधानिक सीमाओं के उल्लंघन में आता है। न्यायमंडल ने यह भी स्वीकार किया कि लोकतांत्रिक समाज को सशक्त अभिव्यक्ति की आज़ादी होती है, लेकिन यह तभी तक वैध है जब यह दूसरों के अधिकारों को प्रभावित न करे।
इस फैसले ने मीडिया, सोशल प्लेटफॉर्म और कला जगत में भारी प्रतिक्रिया पैदा की है। कुछ लोग इसे सेंसरशिप का संकेत बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे सामाजिक सरोकार का संरक्षण मान रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, क्लब स्टैंड-अप, कवि संगोष्ठियाँ तथा सोशल मीडिया पर विचार साझा करने वाले कलाकार अब भाषा और भावनाओं को लेकर दो बार सोचना शुरू करेंगे।
इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय संविधान के दृष्टिकोण में ‘गरिमा’ और ‘सम्मान’ की सीमाएं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से आगे रखी गई हैं। कोर्ट ने कमेडियनों को भी इस फैसले के अनुरूप सावधानी रखने की सलाह दी।