Last Updated Oct - 30 - 2025, 01:03 PM | Source : Fela News
याचिकाकर्ता ने कहा कि बिना वजह ऐहतियाती शक्तियों का इस्तेमाल सत्ता का दुरुपयोग है, जो लोगों की आजादी और कानून की प्रक्रिया के खिलाफ है.
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (30 अक्टूबर, 2025) को सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो की याचिका पर केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन से जवाब मांगा है. उन्होंने कहा है कि वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत जो हिरासत में लिया गया है, वह अवैध और मनमाना है.
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने केंद्र और लद्दाख प्रशासन को 10 दिन में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई 24 नवंबर को होगी. अदालत ने कपिल सिब्बल को भी जवाब दाखिल करने की अनुमति दी है.
याचिका में कहा गया है कि हिरासत पुरानी FIR, कमजोर आरोपों और झूठे दावों पर आधारित है. इसमें कोई कानूनी आधार नहीं है. बिना वजह ऐहतियाती शक्तियों का इस्तेमाल सत्ता का दुरुपयोग है और यह संविधान के तहत मिलने वाली स्वतंत्रता और उचित प्रक्रिया के खिलाफ है.
पत्नी का कहना है कि वांगचुक पिछले 30 सालों से शिक्षा, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण में देश-विदेश में सम्मान पा रहे हैं, फिर भी अचानक उन्हें निशाना बनाया गया. उन्होंने बताया कि चुनावों से दो महीने पहले और लद्दाख के नेताओं व गृह मंत्रालय की बातचीत से ठीक पहले, उनके खिलाफ कई कार्रवाई की गई — जैसे भूमि पट्टा रद्द करना, एफसीआरए रद्द करना, सीबीआई जांच और आयकर नोटिस भेजना.
याचिका में दावा किया गया है कि ये सब कदम वांगचुक को चुप कराने की साजिश हैं, न कि सुरक्षा या कानून व्यवस्था की असली चिंता के कारण.
उन्होंने कहा कि लेह में 24 सितंबर को हुई हिंसा में वांगचुक की कोई भूमिका नहीं थी. न उन्होंने कोई भड़काऊ बयान दिया और न ही उनके खिलाफ कोई सबूत है. उल्टा उन्होंने सोशल मीडिया पर हिंसा की निंदा की थी.
याचिका में यह भी कहा गया कि वांगचुक को हिरासत के कारण 28 दिन बाद बताए गए, जो रासुका की धारा 8 का उल्लंघन है.
गौरतलब है कि वांगचुक को 26 सितंबर को हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद रासुका के तहत हिरासत में लिया गया था. यह प्रदर्शन लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुआ था, जिसमें चार लोगों की मौत और 90 घायल हुए थे. सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने हिंसा भड़काई थी.
रासुका के तहत सरकार किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रख सकती है, अगर वह देश की सुरक्षा या शांति के लिए खतरा माना जाए.