Last Updated May - 09 - 2026, 12:27 PM | Source : Fela News
Suvendu Adhikari Oath:कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में 9 मई को शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. बंगाल में पहली बीजेपी सरकार के गठन को लेकर तैयारियां तेज हैं, जबकि ममता बनर्जी की मौजूदगी पर सस्पेंस बना हुआ है.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है. कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले हैं. इस समारोह को लेकर बीजेपी ने भव्य तैयारियां शुरू कर दी हैं. पूरे मैदान को सजाया जा रहा है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. बीजेपी इसे सिर्फ शपथ ग्रहण नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बड़े प्रतीक के तौर पर पेश कर रही है.
बीजेपी विधायक दल ने चुना नेता
शुक्रवार को कोलकाता में बीजेपी विधायक दल की अहम बैठक हुई, जिसमें शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुना गया. इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे. बीजेपी ने अमित शाह को पश्चिम बंगाल के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया था, जबकि ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को सह-पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दी गई थी. बैठक के बाद बीजेपी नेताओं ने इसे बंगाल में “नई शुरुआत” बताया.
शपथ ग्रहण में जुटेंगे बड़े चेहरे
शनिवार को होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह समेत केंद्र सरकार के कई बड़े मंत्री और बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हो सकते हैं. बीजेपी इस आयोजन को शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देख रही है. पार्टी नेताओं का दावा है कि बंगाल में पहली बार बीजेपी सरकार बनने से राज्य की राजनीति पूरी तरह बदल जाएगी.
ममता बनर्जी की मौजूदगी पर सस्पेंस
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या ममता बनर्जी शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगी या नहीं. फिलहाल इसको लेकर तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
संविधान क्या कहता है?
संविधान में ऐसा कोई नियम नहीं है जो किसी पूर्व मुख्यमंत्री को नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण में शामिल होने के लिए बाध्य करे. यह पूरी तरह राजनीतिक परंपरा, शिष्टाचार और व्यक्तिगत रिश्तों पर निर्भर करता है. कई मौकों पर पुराने मुख्यमंत्री नए मुख्यमंत्री को बधाई देने के लिए कार्यक्रम में शामिल होते रहे हैं, लेकिन राजनीतिक मतभेदों की वजह से कई बार नेता दूरी भी बना लेते हैं.
ममता ने इस्तीफा देने से किया इनकार
7 मई को राज्यपाल आर.एन. रवि ने विधानसभा को भंग कर दिया था. इसके बाद ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया. हालांकि संवैधानिक व्यवस्था के तहत नई सरकार के शपथ लेने तक वह कार्यवाहक भूमिका में रह सकती हैं, लेकिन बड़े प्रशासनिक फैसले लेने का अधिकार अब उनके पास नहीं रहेगा. ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या ममता बनर्जी इस ऐतिहासिक समारोह में पहुंचेंगी या नहीं.
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