Last Updated Nov - 20 - 2025, 04:36 PM | Source : Fela News
निठारी कांड में पंढेर ने आरोपों को ड्रामा बताया, कोर्ट बरी, मामला जांच और मीडिया विवादों से घिरा।
मोनिंदर सिंह पंढेर का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोपों में बहुत कुछ गलतफहमी और ड्रामा था। उन्होंने कोठी डी-5 के अपने घर के पीछे मिले बच्चों के कंकाल के मामले में सवाल उठाए हैं, और बताया है कि उन्हें कभी यह अंदेशा नहीं हुआ कि उनके घर में कुछ भयानक हो रहा है।
पंढेर ने आज तक को कहा कि वह “ड्रामा का हिस्सा बने।” उनकी शिकायत है कि जांच में उनका बहुत कुछ गलत तरीके से जोड़ा गया, ताकि वह शिकार बने। उनका दावा है कि असल में उन्हें फंसाने की कहानी बनाई गई थी, और वे इस पूरे मामले में पब्लिसिटी की वजह से दबाव में रहे।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें कभी नाले वाली बदबू या किसी संदेह की बात सुनने को मिली, क्योंकि कोठी डी-5 के पास एक नाला था, तो पंढेर ने कहा कि उन्हें बदबू वाजिब लगी क्योंकि वह नाला सार्वजनिक था और लोग वहां आसपास बैठते थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोठी उनका “नॉर्मल घर” था, कोई डरावनी जगह नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि नौकर सुरेंद्र कोली पर जो आरोप लगे, जैसे बच्चों का पिटारा खोलना, हत्या करना, और अन्य भयानक गतिविधियाँ, उसके लिए उन्होंने कभी जिम्मेदारी नहीं मानी। पंढेर का कहना है कि कोली को उन्होंने पुलिस के बुलाने पर अपने गांव से लाया था, और उन पर आरोपों की सच्चाई पर उन्हें भरोसा नहीं था।
इस सब के बीच, कोर्ट ने हाल में उनका फैसला सुना है, इलाहाबाद हाई कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने पंढेर और कोली को बरी कर दिया है। पंढेर कहते हैं कि उनकी सोच में न्याय अभी पूरा नहीं हुआ है, “मैं भी पीड़ित हूँ,” वे कहते हैं।
उनकी जुबानी यह पूरे निठारी कांड को सिर्फ एक अपराध की घटना नहीं, बल्कि एक लंबे समय तक जारी रहने वाली पॉलिटिक्स, मीडिया ड्रामा और जांच की आलोक में देखे जाने वाली कहानी बनाती है।
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