Last Updated Aug - 22 - 2025, 12:45 PM | Source : Fela News
केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक अहम बिल पेश किया है, जो राजनीति में नैतिकता और पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 लोकसभा में पेश किया। इस बिल में प्रावधान है कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री अगर किसी गंभीर अपराध के आरोप में गिरफ्तार होकर लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहते हैं, तो 31वें दिन उन्हें पद से हटा दिया जाएगा। प्रधानमंत्री को हटाने का अधिकार राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री को हटाने का अधिकार राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री को हटाने का अधिकार लेफ्टिनेंट गवर्नर को होगा।
हालांकि, रिहाई के बाद उन्हें दोबारा नियुक्त किया जा सकेगा। बिल के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया है कि जनता के निर्वाचित प्रतिनिधि लोगों की आशाओं और विश्वास का प्रतीक होते हैं। ऐसे में उनके आचरण और चरित्र पर कोई संदेह की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
सरकार का तर्क है कि गंभीर अपराध के आरोप झेल रहे और हिरासत में बंद मंत्री संवैधानिक नैतिकता व सुशासन के सिद्धांतों को कमजोर कर सकते हैं। यह कदम ‘संवैधानिक भरोसे’ को बनाए रखने और जनता के विश्वास को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।