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पुजारी की चेतावनी से खाली हुआ गांव, डर से जंगल में डेरा, मौत का साया!

पुजारी की चेतावनी से खाली हुआ गांव, डर से जंगल में डेरा, मौत का साया!

Last Updated Apr - 03 - 2026, 01:28 PM | Source : Fela News

Ajab Gajab News: तेलंगाना के गांद्रपल्ली गांव में तीन महीने में 28 मौतों के बाद डर फैल गया। पुजारी की सलाह पर ग्रामीण गांव छोड़ जंगल में पूजा करने चले गए, स्वास्थ्य जांच की मांग उठी।
पुजारी की चेतावनी से खाली हुआ गांव
पुजारी की चेतावनी से खाली हुआ गांव

Telangana News: तेलंगाना के करीमनगर जिले का गांद्रपल्ली गांव इन दिनों गहरे डर और सन्नाटे में डूबा हुआ है। कभी सामान्य जीवन और चहल-पहल से भरा रहने वाला यह गांव अब लगभग खाली हो चुका है। पिछले करीब 90 दिनों में यहां 28 लोगों की मौत होने से ग्रामीणों में भारी दहशत फैल गई है। लगातार हो रही इन मौतों ने लोगों के मन में ऐसा डर पैदा कर दिया कि उन्होंने पूरे गांव को छोड़कर जंगल में डेरा डालने का फैसला कर लिया।

ग्रामीणों के अनुसार, इन मौतों में सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं बल्कि युवा और स्वस्थ लोग भी शामिल हैं। अलग-अलग कारणों से हुई इन मौतों को लेकर गांव में यह धारणा बन गई कि किसी बुरी शक्ति का असर है। इसी डर के चलते लोगों ने मेडिकल जांच के बजाय धार्मिक उपायों पर भरोसा किया।

बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने गांव के पुजारी और ज्योतिषियों से सलाह ली। पुजारी ने गांव की स्थिति को ‘अशुभ’ बताते हुए कहा कि इस संकट से बचने के लिए पूरे गांव को अस्थायी रूप से खाली करना होगा और विशेष पूजा-अनुष्ठान करना होगा। इसके बाद ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया।

गुरुवार तड़के गांव के सभी लोगों ने अपने घरों में ताला लगाया और परिवार, बच्चों तथा मवेशियों के साथ गांव छोड़ दिया। सभी लोग पास के जंगल और बाहरी इलाकों में पहुंचे, जहां उन्होंने अस्थायी ठिकाने बनाए। वहां पारंपरिक तरीके से भोजन तैयार किया गया और देवी-देवताओं की पूजा की गई। इस दौरान गांव पूरी तरह वीरान हो गया और वहां सन्नाटा छा गया।

हालांकि, इस पूरी घटना ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इतने कम समय में 28 मौतें होना एक गंभीर मामला है। इसे अंधविश्वास से जोड़कर नजरअंदाज करना सही नहीं है। उनका मानना है कि गांव में तुरंत मेडिकल कैंप लगाकर सभी लोगों की जांच की जानी चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, इन मौतों के पीछे कोई संक्रमण, दूषित पानी, या अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारण हो सकते हैं। अगर समय रहते सही जांच और इलाज नहीं किया गया, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसलिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।

फिलहाल, गांद्रपल्ली के ग्रामीण डर और विश्वास के बीच जी रहे हैं। एक ओर वे धार्मिक उपायों के जरिए संकट टालने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने यह भी दिखाया है कि आज भी कई जगहों पर लोग स्वास्थ्य सेवाओं के बजाय परंपराओं पर ज्यादा भरोसा करते हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन मौतों की असली वजह क्या है और क्या समय रहते इसका सही समाधान निकल पाएगा, ताकि गांव के लोग फिर से अपने घर लौट सकें और सामान्य जीवन जी सकें।

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