Last Updated May - 20 - 2026, 01:03 PM | Source : Fela News
भारत के आईटी सेक्टर पर AI संकट के बादल मंडरा रहे हैं। बेंगलुरु से गुरुग्राम तक लाखों इंजीनियर अमेरिकी टेक कंपनियों पर निर्भर हैं, ऐसे में छंटनी का सीधा असर भारतीय नौकरियों पर पड़ सकता है।
अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों में फिर से छंटनी का दौर शुरू हो गया है और इस बार इसकी सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को माना जा रहा है. Meta और LinkedIn जैसी दिग्गज कंपनियों ने हजारों कर्मचारियों की नौकरी खत्म करने और बड़े स्तर पर रीस्ट्रक्चरिंग का ऐलान किया है. लेकिन इसका असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि भारत के लाखों आईटी प्रोफेशनल्स पर भी पड़ सकता है.
Meta ने अपने करीब 10 फीसदी कर्मचारियों की कटौती करते हुए AI-केंद्रित टीमों में निवेश बढ़ाने का फैसला लिया है. वहीं LinkedIn भी 600 से ज्यादा नौकरियां खत्म कर रही है. टेक इंडस्ट्री अब तेजी से पारंपरिक नौकरियों से हटकर AI आधारित वर्कफोर्स की तरफ बढ़ रही है.
भारत, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा आईटी टैलेंट हब माना जाता है, इस बदलाव से सीधे प्रभावित हो सकता है. बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम जैसे शहरों में हजारों इंजीनियर अमेरिकी कंपनियों के लिए काम करते हैं. ऐसे में अमेरिकी कंपनियों की छंटनी का असर भारत में नई भर्तियों, आउटसोर्सिंग प्रोजेक्ट्स और कॉन्ट्रैक्ट जॉब्स पर दिखाई दे सकता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में सिर्फ वही कर्मचारी सुरक्षित रहेंगे जिनके पास AI, मशीन लर्निंग, डेटा मॉडलिंग और ऑटोमेशन जैसी नई स्किल्स होंगी. Meta पहले ही हजारों कर्मचारियों को AI रोल्स में शिफ्ट कर रही है. इसका साफ मतलब है कि अब कंपनियां पारंपरिक कोडिंग और सपोर्ट रोल्स से ज्यादा AI एक्सपर्ट्स को प्राथमिकता दे रही हैं.
भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम पर भी इसका असर पड़ सकता है. Meta और Microsoft जैसी कंपनियों के विज्ञापन और क्लाउड सर्विसेज महंगी होने से छोटे स्टार्टअप्स की लागत बढ़ सकती है.
वहीं अमेरिका में H-1B वीजा पर काम कर रहे भारतीय पेशेवरों के लिए भी खतरा बढ़ गया है. नौकरी जाने की स्थिति में उन्हें सीमित समय के भीतर नई नौकरी ढूंढनी होगी, वरना अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है.
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