Last Updated May - 19 - 2026, 04:11 PM | Source : Fela News
Delhi-NCR Transport Strike: 21 से 23 मई तक दिल्ली-NCR में टैक्सी-ऑटो सेवाएं प्रभावित रहेंगी. AIMTC के नेतृत्व में परिवहन यूनियनों ने सांकेतिक चक्का जाम का ऐलान किया, जिससे यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है.
दिल्ली-एनसीआर में अगले सप्ताह ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है. टैक्सी, ऑटो और ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने 21 मई से तीन दिन के सांकेतिक चक्का जाम का ऐलान कर दिया है. ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के नेतृत्व में दर्जनों यूनियनें सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं. यूनियनों ने चेतावनी दी है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल सकता है.
AIMTC ने दिल्ली के उपराज्यपाल Tarunjit Singh Sandhu और मुख्यमंत्री Rekha Gupta को पत्र लिखकर बढ़े हुए पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC), बीएस-4 वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंध और बढ़ते ट्रांसपोर्ट खर्चों को लेकर नाराजगी जताई है.
ECC शुल्क पर ट्रांसपोर्ट यूनियनों का विरोध
परिवहन संगठनों का कहना है कि ECC शुल्क का उद्देश्य केवल उन वाहनों को नियंत्रित करना था जो बिना काम के दिल्ली से गुजरते हैं, लेकिन अब राजधानी में जरूरी सामान लाने वाले ट्रकों और कमर्शियल वाहनों पर भी भारी शुल्क लगाया जा रहा है. यूनियनों का दावा है कि इससे ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी और सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा.
बैठक में शामिल यूनियनों ने बताया कि भारी ट्रकों पर ECC शुल्क में 40 से 55 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है. वहीं छोटे कमर्शियल वाहनों के लिए भी खर्च काफी बढ़ गया है. ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि डीजल, टोल टैक्स, फिटनेस और मेंटेनेंस का खर्च पहले ही बढ़ चुका है, ऐसे में नया आर्थिक बोझ कारोबार को नुकसान पहुंचा रहा है.
बीएस-4 वाहनों पर रोक से बढ़ी चिंता
यूनियनों ने 1 नवंबर 2026 से बीएस-4 वाणिज्यिक वाहनों के दिल्ली प्रवेश पर प्रस्तावित रोक का भी विरोध किया है. उनका कहना है कि लाखों छोटे ट्रांसपोर्टर अब भी इन वाहनों पर निर्भर हैं और अचानक प्रतिबंध से उनकी आजीविका प्रभावित होगी.
यूनियनों की मांग है कि बीएस-6 वाहनों को पूरी छूट दी जाए और बीएस-4 वाहनों पर चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध लागू किया जाए. साथ ही वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को निर्धारित समय तक चलाने की अनुमति मिले.
ऑटो-टैक्सी यूनियनों ने भी बढ़ाया दबाव
इधर ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने भी किराया बढ़ाने की मांग तेज कर दी है. उनका कहना है कि सीएनजी, बीमा, टायर और मेंटेनेंस का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जबकि किराया पुराने स्तर पर ही बना हुआ है.
यूनियनों ने ओला, उबर और रैपिडो जैसी बाइक टैक्सी सेवाओं पर रोक लगाने की भी मांग की है. उनका कहना है कि इससे पारंपरिक ऑटो और टैक्सी चालकों की कमाई प्रभावित हो रही है.
अगर सरकार और यूनियनों के बीच जल्द समझौता नहीं हुआ तो 21 से 23 मई तक दिल्ली-एनसीआर में टैक्सी, ऑटो और माल ढुलाई सेवाओं पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है.
यह भी पढ़े
May - 19 - 2026
PM Narendra Modi Norway Visit: नॉर्वे दौरे के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi की प... Read More