Last Updated Feb - 27 - 2026, 03:50 PM | Source : Fela News
दिल्ली शराब घोटाला मामले में राउज एवन्यु कोर्ट के फैसले ने अरविंद केजरीवाल और AAP को बरी तो कर दिया, लेकिन इस घोटाले ने उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा, साख और चुनावी स्थिति पर गहरा असर डाला.
दिल्ली की राजनीति में ‘शराब घोटाला’ के नाम पर चल रहे विवाद ने आम आदमी पार्टी (AAP) और इसके नेता अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक जीवन पर गहरा असर छोड़ा है, जैसा कि राउज एवन्यु कोर्ट के फैसले में सामने आया है. रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने सीबीआई की चार्जशीट को कमजोर मानते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनके कैबिनेट सहयोगी मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को इस मामले में बरी कर दिया. इस फैसले से आरोपों के खिलाफ बरी होने के बावजूद AAP और उसके नेताओं को जो राजनीतिक और व्यक्तिगत नुकसान हुआ है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने अपने फैसले में यह कहा कि चार्जशीट में इतने कमजोर सबूत पेश किए गए कि वह आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे. कोर्ट ने टिप्पणी की कि CBI की ओर से केजरीवाल के खिलाफ नाम जुड़ने के लिए ठोस सबूत नहीं थे और समन भेजे जाने के तरीके को भी पूरी तरह कानूनी नहीं माना गया.
अरविंद केजरीवाल को 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया गया था और इसके बाद उन्हें लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार के लिए अंतरिम जमानत मिली. कुल मिलाकर उन्होंने करीब 5–6 महीने जेल में बिताए, लेकिन इस अवधि में भी उन्होंने जेल से ही दिल्ली की सरकार को संभालने की कोशिश की. इस दौरान जमानत के लिए संघर्ष और अदालतों की सख्त टिप्पणियों ने भी उनके राजनीतिक जनाधार पर असर डाला.
AAP के लिए चुनावी क्षति भी गंभीर रही. शराब घोटाले के दाग ने पार्टी को 2024 के लोकसभा चुनाव में भारी नुकसान पहुंचाया, जिसमें दिल्ली की सभी सात संसद सीटों पर AAP और कांग्रेस का गठबंधन हार गया. रिपोर्ट के अनुसार इस हार के लिए घोटाले के दुष्प्रभाव को एक बड़ा कारण माना गया.
राजनीतिक साख और संगठनात्मक मजबूती भी इस मामले से प्रभावित हुई. घोटाले के कारण पार्टी की छवि पर गंभीर सवाल उठे और विपक्षी दलों ने इसका लाभ उठाया. AAP के भीतर भी इस विवाद ने संगठनात्मक तनाव और चुनौतियों को जन्म दिया, जिससे पार्टी को राजनीतिक रणनीति को फिर से आकार देने की आवश्यकता महसूस हुई.
हालांकि अदालत ने आरोपों को खारिज कर दिया और आरोपियों को बरी किया, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार इस फैसले के बावजूद AAP के राजनीतिक नुकसान और साख को पुनर्स्थापित करने में लंबा समय लग सकता है. पार्टी को अब अपने राजनीतिक भविष्य और जनाधार को दोबारा मजबूत करने के लिए नए सिरे से प्रयास करने होंगे.
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