Last Updated Dec - 15 - 2025, 04:19 PM | Source : Fela News
CJI बोले—प्रदूषण अमीर बढ़ाते हैं, लेकिन इसकी सबसे भारी कीमत गरीबों को चुकानी पड़ती है
दिल्ली की जहरीली हवा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी ने एक बार फिर प्रदूषण की असली तस्वीर सामने रख दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रदूषण फैलाने में अमीर वर्ग की बड़ी भूमिका है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा नुकसान गरीबों को उठाना पड़ता है।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि बड़े वाहन, ज्यादा संसाधन और अत्यधिक उपभोग प्रदूषण को बढ़ाते हैं। अमीर तबका आरामदायक जीवनशैली के नाम पर ज्यादा कारें, ज्यादा ऊर्जा और ज्यादा संसाधनों का इस्तेमाल करता है, जिससे पर्यावरण पर बोझ बढ़ता है। लेकिन इस प्रदूषण की मार झुग्गियों में रहने वाले, दिहाड़ी मजदूरों और खुले में काम करने वाले गरीबों को झेलनी पड़ती है।
उन्होंने यह भी कहा कि गरीबों के पास न तो एयर प्यूरीफायर होते हैं, न महंगे मास्क और न ही प्रदूषित इलाकों से दूर रहने का विकल्प। उन्हें उसी जहरीली हवा में सांस लेनी पड़ती है, जहां वे काम करते हैं और रहते हैं। इस स्थिति को सामाजिक असमानता से जोड़ते हुए CJI ने इसे बेहद गंभीर समस्या बताया।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि सिर्फ नियम बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सभी वर्गों को जिम्मेदारी समझनी होगी। प्रदूषण को रोकने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास संसाधन ज्यादा हैं। अदालत ने सरकार और संबंधित एजेंसियों से भी पूछा कि गरीबों को प्रदूषण से बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
दिल्ली की हवा हर साल सर्दियों में जानलेवा स्तर पर पहुंच जाती है। स्कूल बंद होते हैं, अस्पतालों में मरीज बढ़ जाते हैं और आम जनजीवन प्रभावित होता है। ऐसे में CJI की यह टिप्पणी सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाली चेतावनी मानी जा रही है।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि प्रदूषण सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का सवाल भी है, जहां गलती किसी और की होती है और सजा किसी और को मिलती है।