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संसद में कुत्ता विवाद फिर क्यों उभरा…रेणुका चौधरी ने प्रिविलेज मोशन पर उठे सवालों का अनोखे अंदाज़ में जवाब दिया

संसद में कुत्ता विवाद फिर क्यों उभरा…रेणुका चौधरी ने प्रिविलेज मोशन पर उठे सवालों का अनोखे अंदाज़ में जवाब दिया

Last Updated Dec - 03 - 2025, 01:26 PM | Source : Fela News

रेणुका चौधरी के मज़ाकिया जवाब ने पेट डॉग विवाद को नई राजनीतिक और सोशल मीडिया बहस में बदल दिया।
संसद में कुत्ता विवाद फिर क्यों उभरा…
संसद में कुत्ता विवाद फिर क्यों उभरा…

कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी का “पेट डॉग” विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। संसद में जब इस मामले पर प्रिविलेज मोशन को लेकर उनसे सवाल पूछा गया, तो उन्होंने चुप रहने की बजाय मज़ाकिया अंदाज़ में माहौल हल्का कर दिया। सवालों के बीच उन्होंने अचानक “भौं-भौं” की आवाज़ निकलकर माहौल को हैरान कर दिया, और फिर मुस्कुराते हुए कहा कि कुछ लोग बेतुके तरीके से मुद्दे को बड़ा बना रहे हैं।

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था, जब एक बयान को लेकर BJP नेताओं ने उन पर विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठा दिया था। उनका आरोप था कि सांसद ने सदन की गरिमा के खिलाफ अनुचित टिप्पणी की। रेणुका चौधरी ने इसे पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए बेवजह मुद्दे खड़े किए जा रहे हैं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या सदन में उनके खिलाफ चल रहे प्रिविलेज मोशन से वह चिंतित हैं, तो उन्होंने हल्का कटाक्ष करते हुए जवाब दिया कि “अगर कोई हर बात पर भौंकने लगे, तो क्या किया जा सकता है।” इसी लाइन के बाद उन्होंने “भौं-भौं” की आवाज़ निकालकर यह जताया कि कुछ आरोपों को गंभीरता से लेना ही नहीं चाहिए। उनके इस जवाब ने सोशल मीडिया पर भी नई चर्चा छेड़ दी।

रेणुका चौधरी ने कहा कि उनके बयान को तोड़ा-मरोड़ा गया है। उनका दावा है कि असल मुद्दों, महंगाई, बेरोजगारी, महिलाओं की सुरक्षा, से ध्यान हटाने के लिए ऐसे विवाद पैदा किए जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एक महिला सांसद को निशाना बनाने का तरीका बेहद गलत है और यह स्वस्थ लोकतंत्र का हिस्सा नहीं हो सकता।

वहीं, BJP नेताओं ने दोहराया है कि मामला केवल बयान का नहीं बल्कि “संसद की गरिमा” का है। उनका कहना है कि किसी भी सदस्य को बयान देते समय मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी है।

पूरे विवाद के बीच रेणुका चौधरी का यह जवाब एक बार फिर साबित करता है कि वह तंज के साथ जवाब देने के लिए जानी जाती हैं। लेकिन आने वाले दिनों में प्रिविलेज कमेटी इस मामले को कैसे देखती है, यह तय करेगा कि यह विवाद सिर्फ राजनीतिक नोकझोंक था या कोई गंभीर संसदीय मुद्दा।

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