Last Updated Nov - 19 - 2025, 04:09 PM | Source : Fela News
पुरानी गाड़ियों के मालिकों पर बड़ा बोझ बढ़ा। केंद्र ने फिटनेस टेस्ट फीस करीब दस गुना बढ़ाई, अब 25,000 रुपये तक चुकाने पड़ेंगे। कार-बाइक-ट्रक सभी पुराने वाहनों क
पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। केंद्र सरकार ने पुराने वाहनों की फिटनेस टेस्ट फीस में भारी बढ़ोतरी कर दी है। पहले जहां लगभग 2,500 रुपये लगते थे, वहीं अब यह बढ़कर करीब 25,000 रुपये तक पहुंच गई है। यह बदलाव कार, बाइक और ट्रक, सभी पुराने वाहनों पर लागू होगा, जिससे गाड़ियों को दोबारा सड़क पर चलाने की लागत कई गुना बढ़ गई है।
जानकारी के मुताबिक, यह बढ़ी हुई फीस देशभर के ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशंस पर लागू होगी, जहां पुरानी गाड़ियों की फिटनेस जांच की जाती है। पहले की तुलना में अब फीस लगभग 10 गुना तक बढ़ी है, जिससे उन लोगों को सीधा असर पड़ेगा जिनके पास 15 साल से ज्यादा पुराने वाहन हैं। कई राज्यों में पुराने वाहनों पर पहले ही ग्रीन टैक्स और पॉल्यूशन कंट्रोल की सख्ती बढ़ चुकी है, ऐसे में यह नई फीस राशि और बोझ बढ़ा रही है।
सरकार का कहना है कि यह नियम सड़क सुरक्षा और पर्यावरण को ध्यान में रखकर लागू किया गया है। पुराने वाहन ज्यादा धुआं छोड़ते हैं और दुर्घटना की आशंका भी ज्यादा रहती है। इसलिए फिटनेस सर्टिफिकेट केवल तभी दिया जाएगा जब वाहन सभी टेस्ट पास कर ले। लेकिन वाहन मालिकों का कहना है कि इतनी भारी फीस बढ़ोतरी उन्हें मजबूरी में अपनी पुरानी गाड़ियों को कबाड़ कराने पर मजबूर कर सकती है।
ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन्स ने भी इसे व्यापारियों और छोटे परिवहन चालकों के लिए एक बड़ा झटका बताया है। खासकर ट्रक और टैक्सी मालिकों के लिए नई फिटनेस फीस बड़ा खर्च साबित हो सकती है, जिससे माल ढुलाई और यात्रा किराये में आगे चलकर बढ़ोतरी होने की आशंका बढ़ गई है।
कुल मिलाकर, फिटनेस फीस में यह बढ़ोतरी पुराने वाहनों को धीरे-धीरे सड़कों से हटाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, लेकिन इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ना तय है।
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