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कर्नाटक कांग्रेस में ये राजनीतिक हलचल क्यों बढ़ती जा रही है

कर्नाटक कांग्रेस में ये राजनीतिक हलचल क्यों बढ़ती जा रही है

Last Updated Nov - 24 - 2025, 12:58 PM | Source : Fela News

कर्नाटक कांग्रेस में डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच सत्ता संघर्ष से राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है।
कर्नाटक कांग्रेस में ये राजनीतिक
कर्नाटक कांग्रेस में ये राजनीतिक

कर्नाटक कांग्रेस में इन दिनों तनाव साफ दिख रहा है। Deputy CM डीके शिवकुमार के समर्थक विधायकों का तीसरा बैच भी दिल्ली पहुंच चुका है, जिससे यह संकेत और मजबूत हो गया है कि पार्टी के भीतर दबाव की राजनीति तेज हो गई है। शिवकुमार गुट लंबे समय से सत्ता संतुलन और पदों को लेकर नाराज चल रहा है, और अब हाईकमान पर दबाव बढ़ाने की कोशिशें खुलकर सामने आने लगी हैं।

सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पहुंचने वाले विधायक लगातार पार्टी नेतृत्व से मुलाकात की कोशिश में हैं। उनकी मांग है कि संगठन और सरकार में शिवकुमार को अधिक अधिकार दिए जाएं। कुछ नेता यह भी चाहते हैं कि अगले चरण में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सिद्धारमैया से लेते हुए शिवकुमार को दी जाए। हालांकि, पार्टी शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर अब तक चुप है, लेकिन विधायकों का यह क्रमिक दिल्ली दौरा राजनीतिक संदेश साफ कर रहा है।

कर्नाटक में पहले भी कई बार दोनों नेताओं के बीच खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं। सत्ता के दो केंद्र, CM सिद्धारमैया और DyCM शिवकुमार—के बीच संतुलन बनाना हाईकमान के लिए हमेशा चुनौती रहा है। लेकिन हाल में बढ़ी इन हलचलों ने पार्टी की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष भी इसे कांग्रेस की अंदरूनी कमजोरी के रूप में पेश कर रहा है।

दिल्ली पहुंचे विधायकों का कहना है कि वे सिर्फ "संगठनात्मक बातों" पर चर्चा के लिए आए हैं, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। तीसरे बैच के कांग्रेस MLAs का यूं एक साथ राजधानी जाना, यह दिखाता है कि शिवकुमार गुट अपनी ताकत दिखाने के मूड में आ चुका है।

इस बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इस मुद्दे पर संयमित बयान दे रहे हैं। वे बार-बार कह रहे हैं कि सरकार स्थिर है और किसी तरह का संकट नहीं है। लेकिन ज़मीनी स्थिति यह बताती है कि असंतोष बढ़ने पर हाईकमान को जल्द ही हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।

कांग्रेस के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है, क्योंकि राज्य में उसकी सरकार बड़ी बहुमत से बनी थी और आंतरिक विवाद किसी भी वक्त राजनीतिक समीकरण बिगाड़ सकते हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दिल्ली में इन बैठकों का नतीजा क्या होता है और क्या पार्टी नेतृत्व दोनों पक्षों को एक साथ बैठाकर तनाव कम कर पाएगा।

 

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