Last Updated Dec - 20 - 2025, 04:38 PM | Source : Fela News
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक बयानबाज़ी ने माहौल गरमा दिया है। टीएमसी नेताओं के हालिया बयानों को लेकर सियासी गलियारों में सवाल उठने लगे हैं कि
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं के बयानों ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। कहीं बाबरी मस्जिद के निर्माण से जुड़ी बातें सामने आ रही हैं तो कहीं भगवान राम को लेकर ऐसे बयान दिए गए, जिन्हें लेकर हिंदू संगठनों में नाराज़गी है। विपक्ष का आरोप है कि टीएमसी जानबूझकर आस्था से जुड़े मुद्दों को छेड़कर राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।
बीजेपी का कहना है कि ये बयान हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले हैं और 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले वोट बैंक को साधने की एक रणनीति का हिस्सा हैं। पार्टी नेताओं का दावा है कि टीएमसी तुष्टीकरण की राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए धार्मिक प्रतीकों को निशाना बना रही है। वहीं टीएमसी की ओर से सफाई दी जा रही है कि उनके बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में चुनावी माहौल धीरे-धीरे गर्म हो रहा है और ऐसे में धर्म से जुड़े मुद्दे फिर से केंद्र में आ रहे हैं। टीएमसी लंबे समय से खुद को सेक्युलर राजनीति की पार्टी बताती रही है, लेकिन हालिया विवादों ने उसकी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया पर भी इन बयानों को लेकर तीखी बहस चल रही है। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी बता रहे हैं, तो कई इसे धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करार दे रहे हैं। इस पूरे विवाद ने बंगाल की राजनीति को और ज्यादा ध्रुवीकृत कर दिया है।
आने वाले समय में यह साफ होगा कि ऐसे बयान टीएमसी के लिए फायदेमंद साबित होते हैं या फिर उल्टा असर डालते हैं। फिलहाल इतना तय है कि आस्था और राजनीति का यह टकराव 2026 के चुनाव तक और तेज हो सकता है।
May - 28 - 2026
Twisha Sharma Case Bhopal:भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस में मध्य... Read More