Last Updated May - 07 - 2026, 04:01 PM | Source : Fela News
Delhi News In Hindi:दिल्ली के यमुना बाजार में 310 परिवारों पर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है. सरकार ने बाढ़ और सुरक्षा जोखिम का हवाला देकर 15 दिन में मकान खाली करने का नोटिस जारी किया.
दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में रहने वाले 310 परिवारों पर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है. प्रशासन ने निगम बोध घाट के पास स्थित इस कॉलोनी को 15 दिनों के भीतर खाली करने का नोटिस जारी किया है. नोटिस मिलते ही इलाके में डर, गुस्सा और असमंजस का माहौल बन गया है. लोगों का कहना है कि वर्षों से यहां रह रहे परिवारों को अचानक हटाने का फैसला उनके भविष्य पर बड़ा संकट खड़ा कर सकता है.
प्रशासन ने यह नोटिस आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 34 के तहत जारी किया है. अधिकारियों के मुताबिक यह पूरा इलाका यमुना के फ्लड प्लेन यानी ओ-जोन क्षेत्र में आता है, जिसे डीडीए की जमीन माना जाता है. हर साल बाढ़ के दौरान सबसे पहले यही बस्ती पानी में डूब जाती है, जिससे लोगों की जान और संपत्ति पर बड़ा खतरा पैदा हो जाता है.
बाढ़ और आपदा का हवाला
दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी और पुरानी दिल्ली के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट डॉ. शशिपाल डबास द्वारा जारी नोटिस में साफ कहा गया है कि लगातार बाढ़ की स्थिति सरकार के लिए गंभीर चुनौती बन रही है. प्रशासन का कहना है कि हर साल राहत और पुनर्वास कार्यों में भारी खर्च और संसाधन लगाने पड़ते हैं. इसी वजह से इस क्षेत्र को संभावित आपदा जोन मानते हुए लोगों को मकान खाली करने का आदेश दिया गया है.
15 दिन का अल्टीमेटम
नोटिस में कहा गया है कि लोग स्वेच्छा से अपने घर और सामान हटा लें, वरना बिना किसी अतिरिक्त सूचना के अतिक्रमण हटाने और तोड़फोड़ की कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई जन सुरक्षा और भविष्य में होने वाली आपदाओं के खतरे को कम करने के लिए की जा रही है.
स्थानीय लोगों में गुस्सा
नोटिस के बाद इलाके के लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है. स्थानीय निवासियों का दावा है कि यह मामला पहले से अदालत में लंबित है और उन्हें हाई कोर्ट से स्टे भी मिला हुआ है. लोगों का कहना है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तब सरकार इस तरह का नोटिस कैसे जारी कर सकती है.
इलाके के कई परिवारों ने कहा कि वे दशकों से यहां रह रहे हैं और अचानक मकान खाली करने के आदेश से उनके सामने रहने और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. फिलहाल प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है और आने वाले दिनों में यह मामला और गरमा सकता है.
यह भी पढ़े