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मूंगफली छिलके सीधे मत डालें, खाद बनाकर दें पौधों

मूंगफली छिलके सीधे मत डालें, खाद बनाकर दें पौधों

Last Updated Feb - 05 - 2026, 06:09 PM | Source : Fela News

मूंगफली के छिलकों को सीधे गमले में डालना पौधों के लिए हानिकारक हो सकता है। सही विधि से कंपोस्ट बनाकर उपयोग करने पर मिट्टी को भरपूर पोषण मिलता है।
मूंगफली छिलके सीधे मत डालें
मूंगफली छिलके सीधे मत डालें

सर्दियों में मूंगफली खाना लगभग हर घर की आदत होती है, लेकिन इसके छिलके अक्सर कूड़े में चले जाते हैं या कई लोग उन्हें सीधे गमलों में डाल देते हैं। मशहूर पर्यावरणविद् पीपल बाबा के अनुसार, यह तरीका पौधों के लिए लाभकारी नहीं बल्कि नुकसानदेह हो सकता है। वजह है मूंगफली के छिलकों का कठोर ढांचा, जो प्राकृतिक रूप से गलने में 4 से 6 महीने तक का समय लेता है। इस दौरान ये फंगस, चीटियों और कीड़ों को आकर्षित कर सकते हैं।

असल में, मूंगफली के छिलके पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें नाइट्रोजन, पोटैशियम और कार्बन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है। लेकिन इनका फायदा तभी मिलता है, जब इन्हें सही तरीके से खाद में बदला जाए।

खाद बनाने का सही तरीका

सबसे पहले मूंगफली के सादे छिलके इकट्ठा करें। यदि नमक वाली मूंगफली खाई है, तो छिलकों को पानी से अच्छी तरह धोकर सुखा लें। इसके बाद इन्हें हल्का कूट लें या छोटे टुकड़ों में तोड़ दें। इससे डीकंपोजिशन की प्रक्रिया तेज हो जाती है। अब एक कंपोस्ट बिन, प्लास्टिक ड्रम या मिट्टी का घड़ा लें। सबसे नीचे सूखी पत्तियों, कागज या कार्डबोर्ड की परत बिछाएं। इसके ऊपर मूंगफली के छिलकों की मोटी परत डालें। फिर थोड़ी पुरानी खाद या बगीचे की मिट्टी डाल दें। डीकंपोजिशन को तेज करने के लिए आप गुड़ मिला पानी या छाछ भी छिड़क सकते हैं। इससे अच्छे बैक्टीरिया सक्रिय होते हैं।

नमी बनाए रखना बहुत जरूरी है। समय-समय पर हल्का पानी छिड़कते रहें, लेकिन ध्यान रखें कि मिश्रण गीला रहे, भीगा नहीं। हर 10-15 दिन में डंडे से इसे उलट-पुलट करें ताकि हवा अंदर जाए और सड़न की बदबू न आए। लगभग 2 से 3 महीनों में छिलके काले, भुरभुरे और मिट्टी जैसे हो जाएंगे। यही तैयार जैविक खाद है।

इस खाद को आप पुरानी मिट्टी में मिलाकर नए पौधे लगा सकते हैं या गमले की ऊपरी 2 इंच मिट्टी हटाकर यह खाद बिछा सकते हैं। चाहें तो वर्मीकंपोस्ट के साथ मिलाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे मिट्टी हल्की, हवादार और पोषक बनती है।

मल्चिंग का विकल्प भी उपयोगी

अगर खाद बनाना संभव न हो, तो मूंगफली के छिलकों को मल्चिंग के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए छिलकों को धोकर सुखा लें और गमले की मिट्टी के ऊपर एक परत बिछा दें। गर्मियों में यह परत मिट्टी की नमी बनाए रखती है और तेज धूप से जड़ों की रक्षा करती है। हालांकि, बरसात के मौसम में इस परत को हटा देना चाहिए, ताकि फंगस न लगे।

क्यों है यह तरीका फायदेमंद

मूंगफली के छिलकों से बनी खाद पूरी तरह जैविक होती है, इसमें कोई खर्च नहीं आता और यह किचन वेस्ट का बेहतरीन उपयोग है। यह मिट्टी की संरचना सुधारती है, सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाती है और पौधों की जड़ों को मजबूत बनाती है। छोटी सी समझदारी से आप कूड़े में जाने वाले छिलकों को बगीचे की ताकत में बदल सकते हैं। सही विधि अपनाकर मूंगफली के छिलके आपके पौधों के लिए पोषण का खजाना बन सकते हैं।

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