Last Updated Feb - 21 - 2026, 04:13 PM | Source : Fela News
सुबह 3 से 4 बजे के बीच जागने को आध्यात्मिक संकेत माना जाता। रिपोर्ट में ब्रह्म मुहूर्त से जुड़े पांच कारण और मान्यताएं बताई गईं।
कई लोग बिना अलार्म के ही सुबह बहुत जल्दी, खासकर 3 से 4 बजे के बीच जाग जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार हिंदू परंपरा में इस समय को ब्रह्म मुहूर्त कहा जाता है और इसे आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि इस समय वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होता है और साधना-ध्यान के लिए अनुकूल माना जाता है।
बताया जा रहा है कि ब्रह्म मुहूर्त में जागना मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता से भी जोड़ा जाता है। इस दौरान मन अपेक्षाकृत शांत रहता है, जिससे ध्यान, जप और अध्ययन जैसे कार्यों में आसानी होती है। कई आध्यात्मिक मान्यताओं में इसे आत्मिक जागरूकता का संकेत भी माना गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक कुछ लोग इसे शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी से भी जोड़ते हैं। सुबह के इस समय में हार्मोनल गतिविधियों में बदलाव होता है, जिससे नींद हल्की हो सकती है और व्यक्ति स्वतः जाग सकता है। वहीं दूसरी ओर आध्यात्मिक मान्यताओं में इसे चेतना के उच्च स्तर से भी संबंधित बताया गया है।
बताया जा रहा है कि ब्रह्म मुहूर्त में जागने के पीछे एक कारण मानसिक शांति की खोज भी हो सकता है। दिनभर की भागदौड़ से पहले का यह समय अपेक्षाकृत शांत होता है, इसलिए कई लोग इस दौरान खुद को अधिक केंद्रित महसूस करते हैं। योग और आयुर्वेद में भी इस समय उठने को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है।
सूत्रों के मुताबिक कुछ मान्यताओं में इसे आध्यात्मिक संकेत या ऊर्जा परिवर्तन से भी जोड़ा जाता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दी जागना कई बार जीवनशैली, तनाव, नींद के पैटर्न या स्वास्थ्य कारणों से भी संबंधित हो सकता है। इस बीच यह भी माना जाता है कि यदि व्यक्ति नियमित रूप से इस समय जागता है, तो वह ध्यान, योग या सकारात्मक गतिविधियों के लिए इसका उपयोग कर सकता है।
कुल मिलाकर ब्रह्म मुहूर्त में जागने को धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अलग-अलग तरह से समझा जाता है, लेकिन परंपराओं में इसे विशेष महत्व दिया गया है।
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