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रोज़े में कौन-सी खजूर सबसे बेहतर? जानिए सही चुनाव का तरीका

रोज़े में कौन-सी खजूर सबसे बेहतर? जानिए सही चुनाव का तरीका

Last Updated Feb - 21 - 2026, 03:45 PM | Source : Fela News

रोज़े में खजूर खाना परंपरा के साथ सेहत के लिए भी जरूरी है. अजवा, मेदजूल और डिगलेट नूर जैसी वैरायटी में फर्क समझकर सही समय पर सही खजूर चुनना जरूरी है.
रोज़े में कौन-सी खजूर सबसे बेहतर?
रोज़े में कौन-सी खजूर सबसे बेहतर?

रमज़ान के महीने में खजूर सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि रोज़ा खोलने की परंपरा और स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है. पूरे दिन बिना भोजन और पानी के रहने के बाद शरीर को तुरंत ऊर्जा, मिनरल्स और प्राकृतिक शुगर की जरूरत होती है, जिसे खजूर आसानी से पूरा कर देता है. यही कारण है कि इफ्तार की शुरुआत खजूर से करना सबसे बेहतर माना जाता है. हालांकि, बाजार में खजूर की सैकड़ों किस्में उपलब्ध हैं, जिनमें से हर वैरायटी का स्वाद, पोषण और शरीर पर असर अलग होता है. 

खजूर में ग्लूकोज, फ्रुक्टोज और सुक्रोज जैसे प्राकृतिक शर्करा तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं. इसके अलावा इसमें पोटैशियम, आयरन, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट्स भी भरपूर मात्रा में होते हैं, जो पाचन, दिल और मांसपेशियों के लिए फायदेमंद हैं. लेकिन यह जानना जरूरी है कि कौन-सी खजूर सेहरी में और कौन-सी इफ्तार में ज्यादा फायदेमंद होती है. 

अजवा खजूर को दुनिया की सबसे प्रीमियम किस्मों में गिना जाता है. इसका रंग गहरा काला होता है और स्वाद हल्का मीठा व मुलायम होता है. इसमें आयरन और एंटीऑक्सिडेंट्स भरपूर होते हैं, जो शरीर की कमजोरी दूर करने और तुरंत ताकत देने में मदद करते हैं. इफ्तार में अजवा खजूर खाना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है, क्योंकि यह जल्दी पचती है और शरीर को तुरंत ऊर्जा देती है. 

मेदजूल खजूर को "खजूरों का राजा" कहा जाता है. इसका आकार बड़ा, स्वाद बहुत मीठा और टेक्सचर बेहद रसीला होता है. इसमें कैलोरी और प्राकृतिक शुगर की मात्रा अधिक होती है, इसलिए यह थकान दूर करने में बेहद प्रभावी है. हालांकि, इसकी अधिक मिठास के कारण सेहरी में इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए, जबकि इफ्तार में यह सबसे अच्छा विकल्प है. 

डिगलेट नूर खजूर हल्के सुनहरे रंग की होती है और इसकी मिठास संतुलित होती है. इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और भूख जल्दी नहीं लगती. यही कारण है कि यह सेहरी के लिए आदर्श खजूर मानी जाती है. यह शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा देती है और पूरे दिन सक्रिय रहने में मदद करती है. 

सफावी और खुदरी जैसी खजूर भी रोज़े के दौरान उपयोगी मानी जाती हैं. इनमें आयरन और मिनरल्स होते हैं, जो शरीर में खून की कमी दूर करने और कमजोरी कम करने में मदद करते हैं. वहीं सुक्करी खजूर बहुत मीठी होती है, इसलिए इसे इफ्तार में ऊर्जा के लिए खाया जा सकता है, लेकिन सेहरी में कम मात्रा में लेना बेहतर रहता है. 

विशेषज्ञों के अनुसार, इफ्तार में ज्यादा मीठी और जल्दी ऊर्जा देने वाली खजूर जैसे अजवा और मेदजूल बेहतर होती हैं, जबकि सेहरी में फाइबर युक्त और संतुलित मिठास वाली खजूर जैसे डिगलेट नूर या जाहिदी ज्यादा फायदेमंद होती हैं. सही खजूर का चयन न सिर्फ रोज़े को आसान बनाता है, बल्कि शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

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