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रोटी का असली इतिहास क्या है, कहां से हुई शुरुआत ?

रोटी का असली इतिहास क्या है, कहां से हुई शुरुआत ?

Last Updated Feb - 20 - 2026, 06:05 PM | Source : Fela News

रोटी मानव सभ्यता के सबसे पुराने खाद्य पदार्थों में से एक है। जानिए दुनिया में पहली रोटी कहां बनी और कैसे यह भारतीय संस्कृति और भोजन का अभिन्न हिस्सा बनी।
रोटी का असली इतिहास क्या है
रोटी का असली इतिहास क्या है

रोटी आज भारतीय भोजन का सबसे अहम हिस्सा मानी जाती है। उत्तर से दक्षिण और गांव से शहर तक, रोटी हर घर की थाली में रोज शामिल होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रोटी की शुरुआत कहां से हुई और यह भारत तक कैसे पहुंची? इतिहास और पुरातात्विक शोध बताते हैं कि रोटी की कहानी हजारों साल पुरानी है और इसका संबंध मानव सभ्यता के शुरुआती विकास से जुड़ा हुआ है। 

पुरातत्वविदों के अनुसार, दुनिया की सबसे पुरानी रोटी के अवशेष जॉर्डन के उत्तर-पूर्वी रेगिस्तान में मिले हैं। यह खोज लगभग 14,400 साल पुरानी मानी जाती है, यानी संगठित खेती शुरू होने से करीब 4,000 साल पहले की । उस समय इंसान शिकारी और भोजन एकत्र करने वाली जीवनशैली जीता था। 

वैज्ञानिकों का मानना है कि शुरुआती मानव जंगली अनाज जैसे जौ और ओट्स को पीसकर आटा बनाते थे और उसे पत्थरों या गर्म सतह पर पकाकर फ्लैट ब्रेड तैयार करते थे। यह आधुनिक रोटी का सबसे शुरुआती रूप माना जाता है। 

इस खोज से यह साबित होता है कि इंसान खेती शुरू करने से पहले ही अनाज का उपयोग करके भोजन बनाने के प्रयोग कर रहा था। धीरे-धीरे जब खेती विकसित हुई, तो गेहूं और जौ जैसे अनाज की खेती शुरू हुई और रोटी का स्वरूप और अधिक विकसित हो गया। 

भारतीय उपमहाद्वीप में रोटी का इतिहास सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ा हुआ है, जो लगभग 3000 ईसा पूर्व की मानी जाती है। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की खुदाई में गेहूं और जौ के दाने मिले हैं, जो इस बात का संकेत देते हैं कि उस समय लोग अनाज उगाकर चपटी रोटी जैसी चीजें बनाते थे। यह इस बात का प्रमाण है कि भारतीय क्षेत्र में रोटी हजारों सालों से भोजन का हिस्सा रही है। 

प्राचीन भारतीय ग्रंथों में भी रोटी का उल्लेख मिलता है। संस्कृत साहित्य और महाभारत जैसे ग्रंथों में "रोटिका" और "चपाती” जैसे शब्दों का जिक्र मिलता है। "रोटिका" शब्द का अर्थ पतली और चपटी रोटी होता है। इससे स्पष्ट होता है कि रोटी केवल 

भोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी हिस्सा रही है। 

मुगल काल में रोटी को और अधिक पहचान और विविधता मिली। 16वीं सदी के ऐतिहासिक दस्तावेज “आइन-ए-अकबरी” में विभिन्न प्रकार की रोटियों का उल्लेख मिलता है। इस काल में तंदूरी रोटी, नान और अन्य फ्लैट ब्रेड लोकप्रिय हुए, जो आज भी भारतीय भोजन का हिस्सा हैं। 

आज रोटी केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में अलग-अलग रूपों में खाई जाती है। भारत में यह गेहूं से बनती है, जबकि मध्य पूर्व में पीटा ब्रेड, यूरोप में फ्लैट ब्रेड और मेक्सिको में टॉर्टिला के रूप में इसका इस्तेमाल होता है। 

इस तरह, रोटी की यात्रा हजारों साल पहले जॉर्डन के रेगिस्तान से शुरू होकर भारतीय सभ्यता में गहराई से जुड़ गई। आज यह केवल एक भोजन नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के विकास और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन चुकी हैं। 

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