Last Updated Jan - 16 - 2026, 11:06 AM | Source : Fela News
Solar Eclipse Eye Damage: सूर्य ग्रहण के समय सूरज को सीधे देखने से आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है। आइए जानते हैं ऐसा क्यों होता है और इसके पीछे की वैज्ञानिक व
Solar Eclipse Eye Damage: सूर्य ग्रहण प्रकृति की एक दिलचस्प घटना है, लेकिन यह आंखों के लिए खतरनाक भी हो सकती है। कई लोग मानते हैं कि जब सूरज आंशिक रूप से ढका होता है, तब उसे देखना सुरक्षित होता है। लेकिन विज्ञान के अनुसार, ग्रहण के दौरान आंखों को नुकसान का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।
सोलर रेटिनोपैथी क्या है?
ग्रहण के समय आंखों को होने वाले नुकसान को मेडिकल भाषा में सोलर रेटिनोपैथी कहा जाता है। यह तब होता है जब तेज धूप सीधे रेटिना को नुकसान पहुंचाती है। रेटिना आंख का वह हिस्सा होता है जो रोशनी को देखने के संकेतों में बदलता है। सूरज हल्का दिखने पर भी उसकी अल्ट्रावायलेट और इंफ्रारेड किरणें इतनी तेज होती हैं कि वे रेटिना की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
ग्रहण के दौरान सूरज क्यों नहीं देखना चाहिए?
ग्रहण के समय सूरज की चमक कम लगती है, लेकिन हानिकारक किरणें कम नहीं होतीं। ये किरणें सीधे आंख में जाकर रेटिना पर असर डालती हैं। क्योंकि सूरज ज्यादा तेज नहीं लगता, लोग उसे ज्यादा देर तक देखते रहते हैं, जिससे नुकसान बढ़ जाता है।
पुतलियों के फैलने का खतरा
आमतौर पर तेज रोशनी में पुतलियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे आंखों में कम रोशनी जाती है। लेकिन ग्रहण के समय माहौल थोड़ा अंधेरा हो जाता है, जिससे पुतलियां फैल जाती हैं। ऐसे में सूरज देखने पर ज्यादा हानिकारक किरणें आंखों में चली जाती हैं और सीधे रेटिना के नाजुक हिस्से को नुकसान पहुंचाती हैं।
आम सनग्लास क्यों बेकार होते हैं?
साधारण सनग्लास चमक तो कम करते हैं, लेकिन अल्ट्रावायलेट और इंफ्रारेड किरणों को नहीं रोकते। इससे आंखों को झूठी सुरक्षा का एहसास होता है। सुरक्षित देखने के लिए केवल ISO 12312-2 सर्टिफाइड सोलर व्यूइंग ग्लासेस का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
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