Last Updated Feb - 06 - 2026, 03:05 PM | Source : Fela News
दुनिया में कुछ देश ऐसे भी हैं जहां एक भी प्राकृतिक पेड़ नहीं है। सवाल यह है कि वहां ऑक्सीजन कैसे मिलती है? वजह जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।
दुनिया में जब भी ऑक्सीजन या पर्यावरण की बात होती है, तो सबसे पहले दिमाग में पेड़ों और जंगलों की तस्वीर उभरती है। आमतौर पर हम यही मानते हैं कि पेड़ ही ऑक्सीजन का सबसे बड़ा और जरूरी स्रोत हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कुछ ऐसे देश और इलाके भी हैं, जहां एक भी प्राकृतिक पेड़ नहीं है, फिर भी वहां लोग सामान्य रूप से सांस लेते हैं और जीवन चलता रहता है? यह सुनकर हैरानी जरूर होती है, लेकिन इसके पीछे विज्ञान और प्रकृति की एक बड़ी वजह छिपी हुई है।
रेगिस्तानी देश जैसे Qatar और Kuwait में प्राकृतिक पेड़ों की संख्या लगभग शून्य है। यहां बेहद कम बारिश होती है और जमीन रेतीली है, जिससे पेड़ों की जड़ें टिक नहीं पातीं। इसी तरह ठंडे इलाकों की बात करें तो Greenland जैसे स्थानों पर कड़ाके की ठंड और जमी हुई पर्माफ्रॉस्ट मिट्टी पेड़ों के विकास में सबसे बड़ी बाधा बनती है। ऐतिहासिक रूप से Iceland में भी लंबे समय तक प्राकृतिक जंगल नहीं पनप सके थे।
अब सवाल उठता है कि जब इन देशों में पेड़ नहीं हैं, तो ऑक्सीजन कहां से आती है? वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह एक आम गलतफहमी है कि सिर्फ जमीन पर मौजूद पेड़ ही ऑक्सीजन बनाते हैं। असल में दुनिया की 50 से 80 प्रतिशत ऑक्सीजन समुद्रों में मौजूद सूक्ष्म जीवों से आती है। फाइटोप्लांकटन, शैवाल और समुद्री घास जैसे छोटे-छोटे जीव प्रकाश संश्लेषण के जरिए भारी मात्रा में ऑक्सीजन पैदा करते हैं। चूंकि पेड़ों से वंचित कई देश समुद्र के किनारे बसे हुए हैं, इसलिए उन्हें समुद्री हवा के जरिए भरपूर ऑक्सीजन मिलती रहती है।
इसके अलावा पृथ्वी की वैश्विक पवन प्रणाली भी इसमें अहम भूमिका निभाती है। हवा लगातार एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक घूमती रहती है। उदाहरण के लिए, अमेजन वर्षावन या दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे घने जंगलों में पैदा हुई ऑक्सीजन हवाओं के जरिए दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच जाती है। यही वजह है कि जिन देशों में हरियाली कम है, वहां भी सांस लेने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन मौजूद रहती है।
आधुनिक तकनीक ने भी इस समस्या को काफी हद तक आसान बना दिया है। ग्रीनलैंड जैसे ठंडे देशों में नियंत्रित ग्रीनहाउस के अंदर पौधों और सब्जियों की खेती की जाती है। इन ग्रीनहाउस में तापमान, नमी और मिट्टी की स्थिति को पूरी तरह कंट्रोल किया जाता है। इससे न सिर्फ हरियाली मिलती है, बल्कि स्थानीय स्तर पर भोजन उत्पादन भी संभव होता है।
वहीं रेगिस्तानी देशों में एडवांस्ड विलवणीकरण तकनीक, ड्रिप सिंचाई और जलवायु नियंत्रित प्लांटेशन के जरिए धीरे-धीरे हरित क्षेत्र बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इन उपायों का मकसद सिर्फ सुंदरता नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन और भविष्य की सुरक्षा भी है।
कुल मिलाकर, पेड़ों की गैरमौजूदगी के बावजूद जीवन इसलिए संभव है क्योंकि प्रकृति ने ऑक्सीजन के कई स्रोत बनाए हैं। समुद्र, हवाएं और आधुनिक तकनीक – तीनों मिलकर यह साबित करते हैं कि धरती पर जीवन सिर्फ जंगलों पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि एक जटिल और संतुलित प्राकृतिक व्यवस्था का नतीजा है।
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