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इंडोनेशिया से मॉरीशस तक 5 देशों में अलग हिंदू पूजा परंपराएं

इंडोनेशिया से मॉरीशस तक 5 देशों में अलग हिंदू पूजा परंपराएं

Last Updated Feb - 28 - 2026, 03:32 PM | Source : Fela News

ऋग्वेद का प्रसिद्ध वाक्य “एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति” हिंदू धर्म की विविध परंपराओं को दर्शाता है. इंडोनेशिया से नेपाल तक कई देशों में हिंदू धर्म माना जाता है, लेकिन वहां पूजा-पाठ के तरीके, रीति-रिवाज और धार्मिक परंपराएं अलग-अलग रूप में देखने को मिलती हैं.
इंडोनेशिया से मॉरीशस तक 5 देशों में अलग हिंदू पूजा परंपराएं
इंडोनेशिया से मॉरीशस तक 5 देशों में अलग हिंदू पूजा परंपराएं

ऋग्वेद का प्रसिद्ध वाक्य “एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति” हिंदू धर्म की विविधता और स्वीकार्यता को दर्शाता है. समय के साथ जब लोग अलग-अलग देशों में बसे, तो वे अपने देवी-देवताओं और परंपराओं को भी साथ लेकर गए. हालांकि देवताओं का स्वरूप वही रहा, लेकिन स्थानीय संस्कृति, भाषा और मान्यताओं के अनुसार पूजा-पद्धतियों में बदलाव देखने को मिला.

दक्षिण-पूर्व एशिया से लेकर हिंद महासागर के द्वीपीय देशों तक हिंदू धर्म ने बिना अपने मूल दर्शन को खोए खुद को अलग-अलग समाजों के अनुसार ढाल लिया. आज कई देशों में हिंदू देवी-देवताओं की पूजा अलग अंदाज में की जाती है.

इंडोनेशिया

दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश होने के बावजूद इंडोनेशिया के बाली द्वीप पर हिंदू धर्म मजबूत परंपरा के रूप में मौजूद है. यहां भगवान शिव की पूजा स्थानीय पूर्वजों की मान्यताओं से जुड़ी हुई है. लोग रोजाना ‘कैनंग सारी’ नाम का प्रसाद घरों और मंदिरों के बाहर अर्पित करते हैं. रामायण का मंचन नृत्य नाटिका के रूप में किया जाता है और धर्म यहां दैनिक जीवन का हिस्सा है.

नेपाल

नेपाल का भारत से गहरा धार्मिक संबंध है, लेकिन यहां की पूजा पद्धतियों में हिमालयी संस्कृति की झलक मिलती है. काठमांडू में जीवित देवी कुमारी की पूजा की परंपरा बेहद खास मानी जाती है. पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित प्रमुख तीर्थ है, जहां हिंदू और बौद्ध परंपराओं का प्रभाव एक साथ देखने को मिलता है.

थाईलैंड

थाईलैंड में बौद्ध धर्म प्रमुख है, फिर भी हिंदू देवी-देवताओं को विशेष सम्मान दिया जाता है. बैंकॉक का एरावन मंदिर ब्रह्मा जी को समर्पित है, जहां रोज बड़ी संख्या में लोग पूजा करने पहुंचते हैं. गणेश जी कलाकारों और व्यापारियों के बीच लोकप्रिय हैं, जबकि रामायण से प्रेरित ‘रामाकिएन’ यहां का राष्ट्रीय महाकाव्य माना जाता है.

कंबोडिया

प्राचीन खमेर साम्राज्य के समय कंबोडिया में हिंदू धर्म का गहरा प्रभाव रहा. अंगकोरवाट मंदिर का निर्माण विष्णु मंदिर के रूप में किया गया था और यह आज भी दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में शामिल है. मंदिरों की दीवारों पर रामायण और महाभारत की कहानियां उकेरी गई हैं, जो उस समय धर्म और शासन के गहरे संबंध को दिखाती हैं.

मॉरीशस

मॉरीशस में हिंदू धर्म भारतीय मजदूरों के साथ 19वीं शताब्दी में पहुंचा. यहां गंगा तलाओ झील को पवित्र माना जाता है और महाशिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालु यात्रा करते हैं. समय के साथ स्थानीय संस्कृति का प्रभाव भी जुड़ गया है और भजन हिंदी, भोजपुरी व स्थानीय भाषाओं में गाए जाते हैं. दिवाली यहां राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाई जाती है.

इन देशों में हिंदू धर्म अलग-अलग रूपों में दिखाई देता है, लेकिन आस्था और परंपरा की मूल भावना आज भी एक समान बनी हुई है.

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