Last Updated Feb - 10 - 2026, 04:30 PM | Source : Fela News
पुरी के लोकनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि पर विशेष परंपरा निभती। मान्यता है श्रीराम ने लौकी से शिवलिंग स्थापित किया था।
ओडिशा के पुरी स्थित प्रसिद्ध लोकनाथ मंदिर महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष धार्मिक आस्था का केंद्र बन जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मंदिर से जुड़ी मान्यताएं और परंपराएं इसे भगवान जगन्नाथ धाम से भी आध्यात्मिक रूप से जोड़ती हैं, जिसके कारण यहां श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उमड़ती है।
बताया जा रहा है कि महाशिवरात्रि के दिन लोकनाथ भगवान के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। स्थानीय परंपरा के अनुसार इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ से लोकनाथ के मिलने की प्रतीकात्मक धार्मिक मान्यता प्रचलित है। इसी विश्वास के कारण इस पर्व पर मंदिर में विशेष अनुष्ठान और पूजा आयोजित की जाती है।
सूत्रों के मुताबिक, लोकनाथ मंदिर से जुड़ी एक प्राचीन कथा भी प्रचलित है। मान्यता है कि वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम पुरी क्षेत्र पहुंचे थे। उस समय पूजा के लिए शिवलिंग उपलब्ध न होने पर उन्होंने लौकी (लौका) से शिवलिंग का निर्माण कर पूजा की। इसी कथा को इस मंदिर की स्थापना से जोड़कर देखा जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर परिसर में स्थित शिवलिंग को अत्यंत प्राचीन माना जाता है और इसे जलमग्न अवस्था में पूजने की परंपरा भी प्रचलित है। वर्ष भर शिवलिंग जल में आच्छादित रहता है और विशेष अवसरों पर ही पूर्ण दर्शन संभव हो पाते हैं।
इस बीच महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर प्रशासन द्वारा विस्तृत पूजा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। श्रद्धालु रात्रि जागरण, अभिषेक और विशेष आरती में भाग लेते हैं। प्रशासन का कहना है कि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं की जाती हैं।
वहीं दूसरी ओर धार्मिक मान्यताओं के कारण यह मंदिर पुरी आने वाले तीर्थयात्रियों के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में शामिल है। भगवान जगन्नाथ धाम की यात्रा लोकनाथ दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है।
कुल मिलाकर महाशिवरात्रि पर लोकनाथ मंदिर आस्था, परंपरा और पौराणिक कथाओं का संगम बन जाता है, जहां श्रीराम द्वारा लौकी से शिवलिंग निर्माण की कथा आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है।
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