Last Updated Feb - 06 - 2026, 12:45 PM | Source : Fela News
7 ancient Shiva temples: भारत में भगवान शिव को जीवित ऊर्जा का स्रोत माना जाता है. काशी से केदारनाथ तक देश में ऐसे 7 प्रमुख शिव मंदिर हैं, जहां शिवलिंग को छूना व
7 ancient Shiva temples: हिंदू धर्म में भगवान शिव को परम ईश्वर के रूप में पूजा जाता है. श्मशान घाट को उनका निवास स्थल माना जाता है और वे राख धारण कर दुखी आत्माओं की प्रार्थनाएं स्वीकार करते हैं. लेकिन देश में कुछ ऐसे प्रमुख शिव मंदिर भी हैं, जहां भक्तों को शिवलिंग को छूने की अनुमति नहीं है.
यह बात कई लोगों के लिए हैरान करने वाली हो सकती है कि जो भगवान मानवता के इतने करीब माने जाते हैं, उनके स्वरूप को छूने पर रोक क्यों है. दरअसल, इसके पीछे केवल नियम ही नहीं, बल्कि गहरी आध्यात्मिक मान्यताएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं.
काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी
दुनिया के सबसे पवित्र शिव मंदिरों में शामिल काशी विश्वनाथ को मोक्ष देने वाला स्थल माना जाता है. यहां शिवलिंग को छूने की अनुमति नहीं है. सभी अनुष्ठान प्रशिक्षित पुजारियों द्वारा तय नियमों और समय-सारणी के अनुसार किए जाते हैं. मान्यता है कि गर्भगृह अत्यंत शक्तिशाली आध्यात्मिक केंद्र है, जहां शारीरिक स्पर्श की बजाय श्रद्धा ही सबसे बड़ा माध्यम है.
केदारनाथ मंदिर, उत्तराखंड
हिमालय की ऊंचाइयों में स्थित केदारनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यहां का शिवलिंग स्वयंभू और अत्यंत ऊर्जावान माना जाता है. भक्तों को इसे छूने की अनुमति नहीं है. केवल पुजारी ही विशेष अनुष्ठानों के दौरान इसका स्पर्श करते हैं.
महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग अपने विशिष्ट स्वरूप और दक्षिणाभिमुख शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है. यहां विशेष रूप से भस्म आरती के समय भक्तों की भारी भीड़ रहती है. शिवलिंग को छूने का अधिकार केवल पुरोहितों तक सीमित है और इस नियम का सख्ती से पालन किया जाता है.
सोमनाथ मंदिर, गुजरात
पहले ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध सोमनाथ ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है. यहां भक्तों को शिवलिंग छूने की अनुमति नहीं है. पूजा दर्शन और पुजारियों द्वारा संपन्न अनुष्ठानों के माध्यम से ही की जाती है.
वैद्यनाथ धाम, देवघर
वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मनोकामना पूर्ति के लिए जाना जाता है. यहां भी शिवलिंग के साथ शारीरिक संपर्क सीमित है. भक्त प्रार्थना, दर्शन और भेंट के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं.
रामनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम
रामायण से जुड़ा यह पवित्र तीर्थ शैव परंपरा में विशेष स्थान रखता है. जल अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर में भी शिवलिंग को सीधे छूने की अनुमति नहीं है.
इन सभी मंदिरों में शिवलिंग को न छूने की परंपरा इस विश्वास से जुड़ी है कि शिवलिंग केवल प्रतीक नहीं, बल्कि जीवंत आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है, जिसका सम्मान नियमों और श्रद्धा के माध्यम से ही किया जाना चाहिए.
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