Last Updated Feb - 11 - 2026, 04:00 PM | Source : Fela News
महाशिवरात्रि की तिथि और निशीथ काल को लेकर भ्रम। 15 और 16 फरवरी के पूजा समय पर पंडितों ने स्पष्टता दी।
महाशिवरात्रि पर्व की तिथि और पूजा के सही समय को लेकर श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष चतुर्दशी तिथि, उदया तिथि और निशीथ काल के अलग-अलग समय पड़ने के कारण पर्व मनाने की तिथि को लेकर भ्रम उत्पन्न हुआ है।
बताया जा रहा है कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को प्रारंभ हो रही है, लेकिन उदया तिथि की स्थिति के कारण कई लोगों में यह प्रश्न है कि व्रत और पूजा किस दिन की जाए। पंचांग गणना के अनुसार, महाशिवरात्रि व्रत में निशीथ काल का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि इसी काल में भगवान शिव का प्राकट्य माना जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 15 फरवरी को चतुर्दशी तिथि तो रहेगी, लेकिन उदया तिथि की गणना को लेकर मतभेद की स्थिति बनी है। वहीं 16 फरवरी को निशीथ काल की उपलब्धता को लेकर भी चर्चा हो रही है, जिससे श्रद्धालु पूजा के उपयुक्त समय को लेकर दुविधा में हैं।
इस बीच ज्योतिषाचार्यों और पंडितों ने पंचांग के आधार पर स्थिति स्पष्ट की है। उनके अनुसार, महाशिवरात्रि का व्रत चतुर्दशी तिथि में ही रखा जाता है और निशीथ काल में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसलिए तिथि और काल दोनों के समन्वय को ध्यान में रखकर पर्व मनाने की सलाह दी गई है।
सूत्रों के मुताबिक, कई मंदिरों और धार्मिक संस्थानों ने भी अपने-अपने पंचांग के आधार पर पूजा कार्यक्रम घोषित किए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को सुविधा हो सके। धार्मिक संगठनों का कहना है कि भ्रम की स्थिति केवल पंचांग भिन्नता और गणना पद्धति के अंतर के कारण उत्पन्न होती है।
वहीं दूसरी ओर, श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे स्थानीय पंचांग, मंदिर परंपरा और विद्वानों की सलाह के आधार पर व्रत एवं पूजा का निर्णय लें। प्रशासन और मंदिर समितियां भी पर्व को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने की तैयारियों में जुटी हुई हैं।
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