Last Updated Feb - 11 - 2026, 11:28 AM | Source : Fela News
ब्रज और काशी की होली में बड़ा अंतर है. वाराणसी में शिव भक्त चिता की राख से होली खेलते हैं, जिसे मसान होली कहा जाता है. यह परंपरा क्यों शुरू हुई और यह पर्व कब मन
Masan Holi 2026: होली रंगों का पर्व है, लेकिन काशी में यह चिता की राख से खेली जाती है. इसे मसान होली कहा जाता है. इस साल मसान होली 28 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी. वाराणसी में रंगभरी एकादशी पर भोलेनाथ और माता पार्वती रंगों से होली खेलते हैं.
इसके अगले दिन, फाल्गुन शुक्ल द्वादशी को भगवान महाश्मशानाथ अपने गणों, भूत-प्रेत और अन्य गणों के साथ भस्म की होली खेलते हैं. शिवपुराण और दुर्गा सप्तशती में भी इसका उल्लेख मिलता है.
मसान होली वाराणसी की एक अनोखी और आध्यात्मिक परंपरा है. इसे राख का त्योहार भी कहा जाता है. यहां लोग रंगों की जगह चिता की भस्म से होली खेलते हैं. यह पर्व जीवन की नश्वरता और मोह-माया से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है.
मसान होली को भस्म होली या भभूत होली भी कहा जाता है. इसे देखने के लिए देश-विदेश से लोग काशी आते हैं. पहले यह परंपरा साधु-संत, अघोरी और आम लोग निभाते थे, हालांकि महिलाओं का इसमें शामिल होना वर्जित माना जाता है.
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मसान होली की शुरुआत भगवान शिव ने की थी. रंगभरी एकादशी के दिन उन्होंने माता पार्वती का स्वागत गुलाल से किया था. अगले दिन अपने गणों के साथ भस्म से होली खेलने की परंपरा शुरू हुई, जिसे आज मसान होली के रूप में मनाया जाता है.
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