Last Updated Nov - 12 - 2025, 02:56 PM | Source : Fela News
काल भैरव जयंती पर मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। जानिए क्यों खास मानी जाती है काल भैरव उपासना का यह दिन।
आज पूरे देश में काल भैरव जयंती श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जा रही है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव का प्राकट्य हुआ था। यह तिथि हर साल मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी को पड़ती है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से भैरव बाबा की पूजा, अर्चना और रात्रि जागरण का बड़ा महत्व बताया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान काल भैरव को समय और न्याय का स्वामी कहा जाता है। उन्हें ‘संहारक रूप’ में जाना जाता है, जो अधर्म का नाश कर धर्म की रक्षा करते हैं। काल भैरव जयंती पर भक्त विशेष पूजा-व्रत करते हैं और अपने जीवन से नकारात्मकता, भय और बुराइयों को दूर करने की कामना करते हैं। कहा जाता है कि इस दिन भैरव बाबा की आराधना करने से पापों का क्षय होता है और मन को शांति मिलती है।
पूजा का शुभ मुहूर्त इस बार दोपहर 12:18 बजे से रात्रि 11:56 बजे तक बताया गया है। इस दौरान भक्त काले तिल, सरसों के तेल का दीपक, काले कपड़े और नारियल चढ़ाकर भगवान भैरव की पूजा करते हैं। साथ ही, मंदिरों में विशेष भोग के रूप में पकौड़े और मिठाई का प्रसाद चढ़ाया जाता है, जिसे बाद में भक्तों में बांटा जाता है।
भगवान भैरव के आठ प्रमुख रूप माने गए हैं — असीतांग, रुरु, चंड, क्रोध, उन्मत्त, कपाली, भीषण और संहार भैरव। हर रूप की अपनी विशेषता है और प्रत्येक भक्त अपनी श्रद्धा अनुसार अलग-अलग स्वरूप की पूजा करता है।
वाराणसी, उज्जैन, काशी और अवंती के भैरव मंदिरों में आज सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ी हुई है। मंत्रोच्चार और घंटियों की गूंज के बीच काल भैरव जयंती का यह दिन सिर्फ आस्था का पर्व नहीं, बल्कि यह याद दिलाता है कि समय के स्वामी भगवान भैरव सदा न्याय और सत्य के साथ खड़े रहते हैं।
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