Last Updated Dec - 12 - 2025, 11:44 AM | Source : Fela News
Haldi ceremony: हिंदू शादी में हल्दी रस्म के बाद दूल्हा-दुल्हन को बाहर नहीं जाने दिया जाता, क्योंकि यह उन्हें नज़र और जोखिम से बचाने की मान्यता है.
Significance of the Haldi ceremony: हिंदू शादी में हल्दी की रस्म का खास महत्व होता है. यह रस्म शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन पर हल्दी लगाकर शुभता और सुरक्षा का आशीर्वाद देने के लिए की जाती है. परंपरा के मुताबिक हल्दी लगाने के बाद दूल्हा-दुल्हन को घर से बाहर नहीं जाने दिया जाता, और इसके पीछे धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक—तीनों कारण हैं.
धार्मिक मान्यता है कि हल्दी शरीर के आसपास सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती है. हल्दी लगने के बाद बाहर जाने पर नकारात्मक ऊर्जा के संपर्क में आने का डर रहता है, जो शादी पर अशुभ असर डाल सकती है. ज्योतिष में भी माना जाता है कि हल्दी की खुशबू का असर राहु-केतु जैसे ग्रहों से जुड़ता है, इसलिए इस समय बाहर निकलने से ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकता है.
वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो हल्दी एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक है. इसे लगाने के बाद त्वचा संवेदनशील हो जाती है और धूप या धूल से एलर्जी व जलन हो सकती है. इसी वजह से हल्दी के बाद बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है, ताकि त्वचा सुरक्षित रहे और निखार बना रहे.
सामाजिक रूप से, हल्दी की रस्म परिवार के साथ समय बिताने और शादी की खुशियों को साझा करने का मौका भी माना जाता है. इसी कारण हल्दी की रस्म के बाद दूल्हा-दुल्हन को घर के माहौल में ही रखा जाता है.
इसी तरह धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक वजहों के चलते हल्दी की रस्म के बाद दूल्हा-दुल्हन को घर से बाहर न जाने देने की परंपरा आज भी निभाई जाती है
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