Last Updated Mar - 09 - 2026, 03:47 PM | Source : Fela News
Ram Navami 2026: साल 2026 में राम नवमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच थोड़ी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इस बार नवमी तिथि 26 और 27 मार्च दोनों दिन पड़ रही है। ऐसे में कई लोग जानना चाहते हैं कि भगवान राम यानी रामलला की पूजा किस दिन करना शुभ और सही रहेगा।
Ram Navami 2026 Date: साल 2026 में राम नवमी दो दिन मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार इस बार चैत्र शुक्ल नवमी तिथि 26 और 27 मार्च दोनों दिन पड़ रही है। इसलिए दोनों दिन भगवान श्रीराम की पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। शास्त्रों के अनुसार राम नवमी केवल भगवान राम का जन्मोत्सव ही नहीं, बल्कि धर्म, सत्य और मर्यादा की स्थापना का भी प्रतीक पर्व है
राम नवमी की तिथि और मुहूर्त
पंचांग के मुताबिक चैत्र शुक्ल नवमी तिथि 26 मार्च 2026 को सुबह 11:38 बजे शुरू होगी और 27 मार्च 2026 को सुबह 10:06 बजे समाप्त होगी। शास्त्रों में कहा गया है कि जिस दिन नवमी तिथि मध्याह्न काल में पड़ती है, उसी दिन भगवान राम का जन्मोत्सव मनाना सबसे उचित माना जाता है। इस आधार पर 26 मार्च 2026 को राम नवमी मनाना अधिक शास्त्रसम्मत माना गया है।
इस दिन श्रीराम की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:13 बजे से दोपहर 1:41 बजे तक रहेगा।
27 मार्च को भी मनाई जाएगी राम नवमी
27 मार्च को वैष्णव संप्रदाय के लोग राम नवमी मनाएंगे। इस दिन नवमी तिथि सुबह करीब 10 बजे तक रहेगी और पूजा का मुहूर्त दोपहर 12:27 बजे बताया गया है।
राम नवमी पूजा विधि
राम नवमी के दिन भक्त सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनते हैं और भगवान राम का ध्यान करके व्रत का संकल्प लेते हैं। इसके बाद रामलला की मूर्ति को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराया जाता है। पूजा में चंदन, फूल और तुलसी अर्पित की जाती है।
मान्यता है कि दोपहर के समय भगवान राम का जन्म हुआ था, इसलिए उस समय शंख और घंटी बजाकर “जय श्रीराम” का जयघोष किया जाता है। इस दौरान रामचरितमानस या वाल्मीकि रामायण के बालकांड का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। इसके बाद भगवान को भोग लगाकर आरती की जाती है।
कब हुआ था भगवान राम का जन्म
वाल्मीकि रामायण के बालकांड के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को, पुनर्वसु नक्षत्र में और जब सभी ग्रह उच्च स्थिति में थे, तब भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था।
ऐसे मनाई जाती है राम नवमी
राम नवमी के दिन भक्त भगवान राम की पूजा करते हैं, रामचरितमानस का पाठ करते हैं और भजन-कीर्तन तथा राम कथा का आयोजन करते हैं। इस दिन रामलला को उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाया जाता है और जरूरतमंदों को दान भी दिया जाता है।
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