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Sankashti Chaturthi 2026: संकष्टी चतुर्थी पर करें मंत्र जाप, बप्पा हरेंगे सारे संकट

Sankashti Chaturthi 2026: संकष्टी चतुर्थी पर करें मंत्र जाप, बप्पा हरेंगे सारे संकट

Last Updated Feb - 04 - 2026, 10:58 AM | Source : Fela News

Sankashti Chaturthi 2026: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 5 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। यह तिथि भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा के लिए विशेष महत्व रखती है। इस दिन चंद्रो
संकष्टी चतुर्थी पर करें मंत्र जाप
संकष्टी चतुर्थी पर करें मंत्र जाप

Sankashti Chaturthi 2026: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जो इस वर्ष गुरुवार, 5 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। यह तिथि भगवान गणेश की पूजा के लिए विशेष मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करने के बाद ही व्रत खोला जाता है।

चंद्रोदय का समय

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा का उदय रात 9 बजकर 50 मिनट पर होगा। हालांकि, शहर और मौसम के अनुसार इसमें कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलना शुभ माना जाता है।

फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी पर भगवान गणेश के द्विजप्रिय स्वरूप की पूजा की जाती है, इसलिए इसे द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इसे कष्टों को दूर करने वाली तिथि भी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर गणेश जी की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और संकटों से मुक्ति मिलती है।

इस दिन भक्त अपनी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए विशेष उपाय करते हैं और मंत्र जाप भी करते हैं। संकष्टी चतुर्थी पर किए गए मंत्र जाप को विशेष फलदायी माना जाता है।

संकष्टी चतुर्थी पर जाप करने योग्य मंत्र

श्री गणेशाय नमः

ॐ विघ्नेश्वराय नमः

वक्रतुंड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभः।

निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा॥

ॐ नमो हेरम्ब मद मोहित मम् संकटान निवारय-निवारय स्वाहा।

ॐ वक्रतुण्डाय हुं।

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।

सिद्ध लक्ष्मी मनोरहप्रियाय नमः। ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वरवरद सर्वजनं मे वशमान्य नमः॥

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय।

नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥

भक्तार्तिनाशनपराय गनेशाश्वराय, सर्वेश्वराय शुभदाय सुरेश्वराय।

विद्याधराय विकटाय च वामनाय, भक्त प्रसन्नवरदाय नमो नमस्ते॥

गणेश वंदना मंत्र

गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारु भक्षणम्।

उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्॥

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