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Vadakkunnathan Temple: त्रिशूर मंदिर में आतिशबाजी हादसा, शिव-शक्ति धाम चर्चा में

Vadakkunnathan Temple: त्रिशूर मंदिर में आतिशबाजी हादसा, शिव-शक्ति धाम चर्चा में

Last Updated Apr - 22 - 2026, 12:55 PM | Source : Fela News

त्रिशूर पूरम से पहले पटाखा फैक्ट्री धमाके से हड़कंप, उत्सव फीका पड़ा। इसी बीच ऐतिहासिक वडक्कुनाथन मंदिर की पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व फिर चर्चा में आया।
त्रिशूर मंदिर में आतिशबाजी हादसा
त्रिशूर मंदिर में आतिशबाजी हादसा

Thrissur Pooram Festival In Kerala:केरल के Thrissur शहर में इन दिनों प्रसिद्ध Thrissur Pooram की तैयारियां जोरों पर थीं, लेकिन एक दर्दनाक हादसे ने पूरे माहौल को झकझोर कर रख दिया। जिले की एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने उत्सव की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया। यह हादसा ऐसे समय हुआ जब पूरा शहर रोशनी, सजावट और भव्य आयोजन की तैयारियों में डूबा हुआ था। इस घटना ने एक बार फिर आतिशबाजी से जुड़े खतरों को उजागर कर दिया है।

दरअसल, त्रिशूर पूरम को “पूरमों की जननी” कहा जाता है। इसकी भव्यता और परंपराएं इसे केरल ही नहीं, पूरे देश के सबसे बड़े मंदिर उत्सवों में शामिल करती हैं। 18वीं शताब्दी में कोचीन के महाराजा सकथान थंपुरन द्वारा शुरू किया गया यह उत्सव आज भी अपनी शान-ओ-शौकत के लिए जाना जाता है। मलयालम महीने मेदम (अप्रैल-मई) में होने वाले इस आयोजन में सजे-धजे हाथियों की शोभायात्रा, चेंडा मेलम की गूंज, रंग-बिरंगी छतरियों का प्रदर्शन और रातभर चलने वाली आतिशबाजी मुख्य आकर्षण होते हैं।

इस भव्य उत्सव का केंद्र है ऐतिहासिक Vadakkunnathan Temple, जो भगवान शिव को समर्पित केरल के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। पारंपरिक केरल शैली की वास्तुकला, लकड़ी की बारीक नक्काशी और प्राचीन भित्ति चित्र इसे अद्वितीय बनाते हैं। माना जाता है कि यह मंदिर करीब 1000 साल से भी अधिक पुराना है और इसकी गिनती संभावित विश्व धरोहर स्थलों में की जाती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना भगवान परशुराम ने की थी। कहा जाता है कि उन्होंने समुद्र से भूमि प्राप्त कर भगवान शिव को यहां स्थापित किया, जहां वे स्वयं प्रकट होकर शिवलिंग के रूप में विराजमान हुए।

मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता यहां का विशाल शिवलिंग है, जो वर्षों से चढ़ाए जा रहे घी की परतों से ढंका हुआ है। हैरानी की बात यह है कि यह घी न तो पिघलता है और न ही इसमें दुर्गंध आती है, जिसे श्रद्धालु आज भी चमत्कार मानते हैं।

इतना ही नहीं, Adi Shankaracharya से भी इस मंदिर का गहरा संबंध बताया जाता है। मान्यता है कि उनके माता-पिता ने संतान प्राप्ति के लिए यहीं प्रार्थना की थी।

हालांकि इस बार त्रिशूर पूरम की तैयारियों के बीच हुआ हादसा लोगों के लिए एक बड़ा सबक बनकर सामने आया है, लेकिन इसके बावजूद इस प्राचीन मंदिर और उत्सव की आस्था और भव्यता आज भी कायम है।

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