Last Updated Jan - 17 - 2026, 11:12 AM | Source : Fela News
Mauni Amavasya 2026: माघ मेला का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण स्नान 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या पर होगा। जानिए इस दिन साधु-संत मौन क्यों रखते हैं और मौन व्रत का
Why saints and sages silent on Mauni Amavasya: प्रयागराज में माघ मेले की शुरुआत 3 जनवरी 2026 को पौष पूर्णिमा से हुई थी और इसका समापन 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि पर होगा। मकर संक्रांति के बाद तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण स्नान मौनी अमावस्या, यानी 18 जनवरी 2026 को किया जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सभी अमावस्याओं में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व होता है। इस दिन साधु-संत और श्रद्धालु गंगा में स्नान करते हैं।
मौनी अमावस्या पर साधु-संत मौन क्यों रखते हैं?
इस दिन साधु-संत और कई लोग मौन व्रत रखते हैं, जिससे मानसिक शांति मिलती है और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है। इससे मन और वाणी दोनों पर नियंत्रण रहता है।
मौन से जागती है चेतना
धार्मिक गुरुओं के अनुसार, मौन व्यक्ति को आत्मा और परमात्मा से जोड़ने में मदद करता है। यह एक आध्यात्मिक अभ्यास है, जो माघ मेले के दौरान पुण्य बढ़ाने के लिए किया जाता है। मौन का अर्थ चुप रहना नहीं, बल्कि मन को एकाग्र करना होता है।
मौन व्रत के लाभ
हिंदू मान्यताओं में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। अमावस्या पर चंद्रमा न दिखने से मन अस्थिर हो सकता है। ऐसे में मौन व्रत रखने से मन शांत होता है और ईश्वर ध्यान में मदद मिलती है। मान्यता है कि इससे मोक्ष की प्राप्ति होती है और मन-वाणी शुद्ध होते हैं।
मौन व्रत के नियम
· ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद मौन व्रत का संकल्प लें।
· देवी-देवताओं की विधि से पूजा करें।
· अमावस्या की तिथि समाप्त होने पर ही व्रत तोड़ें।
· व्रत के दौरान मन और वाणी से गलत विचार न आने दें।
· पूरे दिन किसी से बात न करें।
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