Last Updated Jul - 29 - 2025, 04:48 PM | Source : Fela News
एशिया कप में भारत-पाक मुकाबले को लेकर योगी सरकार के मंत्रियों के बयान से राजनीतिक बहस तेज हो गई है। देशभक्ति और खेल भावना के बीच नई सियासी रेखाएं खिंच गईं।
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री एवं निशाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निशाद ने हाल ही में कहा है कि एशिया कप 2025 में भारत-पाकिस्तान का मुकाबला होना चाहिए, क्योंकि “हमारे खिलाड़ी भी उसे खेलना चाहते हैं।” यह बयान राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही पक्षों में बड़े विवाद की वजह बना हुआ है।
एशिया कप 2025 में भारत और पाकिस्तान दोनों को एक ही ग्रुप में रखा गया है। पहला मैच 14 सितंबर को होगा। हालिया पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ समेत बढ़ते तनावपूर्ण माहौल के बीच इस मैच को लेकर देश में तीखी बहस चल रही है।
संजय निशाद के तर्क:
उन्होंने कहा है कि क्रिकेट खिलाड़ियों और प्रशंसकों के नजरिए से यह मुकाबला आयोजित होना चाहिए। "हमारे खिलाड़ी उसका सामना करने को तैयार हैं, समाज में क्रिकेट को खेल और सांस्कृतिक मेलजोल के रूप में रखा जा सकता है," निशाद ने Lok Sabha सत्र में कहा।
विरोधियों की मुख्य आपत्तियाँ:
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सदन में सवाल उठाया कि जब सरकार ने व्यापार बाधित कर दिया है और आतंकवाद को संभालने में गंभीर कदम उठाए गए हैं, तो क्या यह उचित है कि उसी पाकिस्तान के खिलाफ मैच देखा जाए। उन्होंने कहा: "क्या सरकार के पास इतना हिम्मत है कि पहलगाम हमले के मृतकों को बुलाकर कहे कि अब क्रिकेट देखिए?"
शिव सेना (UBT) के सांसद अरविंद सावंत ने भी कहा कि मौजूदा राजनीतिक तनाव के बीच खेल और राजनीति को अलग रखना मुश्किल है। उन्होंने पूछा, "जब कश्मीर पर नीति स्पष्ट नहीं, तब खेल क्यों?"
तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बंद्योपाध्याय ने बीजेपी-सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान के साथ किसी भी स्तर पर समन्वय में शामिल होना अनुचित है—"हमारा एकमात्र Engagement battlefield पर होना चाहिए"
खेल जगत की संवेदनशीलता:
पूर्व कप्तान मोहम्मद आज़हरुद्दीन ने स्पष्ट कहा कि "मौजूदा तनाव में यह मैच नहीं होना चाहिए"। उन्होंने भावनात्मक और नैतिक दृष्टिकोण से खेद व्यक्त किया कि इसे अभी आयोजित करना ठीक नहीं होगा।
गौतम गंभीर ने भी कहा कि "जब तैनाती और सुरक्षा संकट है, तब खेल पर शर्मिंदगी से देखा जाए"
सरकार और BCCI की स्थिति:
खेल मंत्रालय ने फिलहाल BCCI को ही अंतिम निर्णय लेने दिया है, क्योंकि नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल अभी पारित नहीं हुआ है। मंत्रालय ने कहा कि “हम बीसीसीआई की प्रतिक्रिया देखेंगे”।
एक रिपोर्ट के अनुसार, BCCI ने एशिया कप में हिस्सा लेने के लिए हरी झंडी दे दी है। इसे सरकार की नीति में कुछ नरमी और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भावना की ओर कदम माना जा रहा है।
टूर्नामेंट बहुपक्षीय है—भारत के न खेलने पर पाकिस्तान को वॉकओवर मिलने की संभावना है, जिससे उनके अंक सामने बढ़ सकते हैं। इसलिए यह विकल्प भी नहीं चुना जाना चाहिए माना जा रहा है।
संजय निशाद जैसे नेताओं ने भारत-पाक मैच को खेल भावना की ओर देखना सही कहा है।
वहीं विपक्षी पार्टियाँ—ओवैसी, सावंत, बंद्योपाध्याय—माना कर रहे हैं कि राष्ट्रीय भावनाओं के बीच खेल आयोजित करना उचित नहीं है।
पूर्व क्रिकेटर भी मैच के विरुद्ध गंभीर भाव से खड़े हैं।
BCCI और सरकार फिलहाल सार्वजनिक भावनाओं तथा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नीतियों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहती हैं।
यह बहस सिर्फ खेल का विरोधाभास नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय संवेदनशीलता और कूटनीतिक समन्वय का पक्ष भी बन चुकी है।
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