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FLAME यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में पीवी सिंधु का भावुक संबोधन, जीवन के संघर्ष और सफलता की कहानी से छात्रों को किया प्रेरित

FLAME यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में पीवी सिंधु का भावुक संबोधन, जीवन के संघर्ष और सफलता की कहानी से छात्रों को किया प्रेरित

Last Updated May - 26 - 2025, 11:26 AM | Source : Fela News

ओलंपिक चैंपियन पीवी सिंधु ने पुणे स्थित FLAME यूनिवर्सिटी के 2025 दीक्षांत समारोह में छात्रों को दिया दिल से जुड़ा प्रेरणादायक संदेश।
FLAME यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में पीवी सिंधु का भावुक संबोधन
FLAME यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में पीवी सिंधु का भावुक संबोधन

2025 के दीक्षांत समारोह में FLAME यूनिवर्सिटी, पुणे का माहौल उस वक्त खास बन गया जब ओलंपिक बैडमिंटन चैंपियन पीवी सिंधु ने मंच से अपनी जिंदगी और करियर के अनुभव साझा किए। उनका विश्वविद्यालय से व्यक्तिगत जुड़ाव भी है, क्योंकि उनके पति साई दत्ता इसी यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र रह चुके हैं। सिंधु ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि FLAME उनके जीवन में कई बार ‘रिटर्न’ हुआ है — पति, मैनेजर और कई करीबी दोस्त सभी का नाता इस संस्थान से है।

अपने भाषण में सिंधु ने 2016 रियो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने के बाद का एक बेहद भावुक पल साझा किया। उन्होंने बताया कि जीत के बाद भी उन्हें एक अधूरापन महसूस हुआ, और वह अकेले बैठकर रोई थीं। इस अनुभव ने यह दिखाया कि खिलाड़ियों की मानसिक और भावनात्मक चुनौतियां, सफलता के क्षणों में भी कितनी गहरी हो सकती हैं।

उन्होंने ओलंपिक की तैयारी के दिनों का भी ज़िक्र किया, जब उनके कोच पुलेला गोपीचंद ने उन्हें सख्त नियमों के तहत रखा — जैसे कि शुगर से पूरी तरह दूरी और मोबाइल फोन का सीमित उपयोग। सिंधु ने माना कि ये कठोर नियम उनकी फोकस और अनुशासन को गढ़ने में अहम साबित हुए।

2022 राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स) में मिली जीत को उन्होंने अपने करियर का टर्निंग प्वाइंट बताया। उन्होंने कहा कि यह जीत उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी एक ‘रिडेम्पशन मोमेंट’ था। सिंधु ने अपने पिता पीवी रमाना और कोच गोपीचंद का खासतौर पर धन्यवाद किया, जिनकी निरंतर प्रेरणा और विश्वास ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।

अपने प्रेरक भाषण के अंत में सिंधु ने छात्रों से कहा कि वे अपने जीवन के सफर को आत्मविश्वास, सच्चाई और लचीलापन (resilience) के साथ अपनाएं। उनका यह उद्बोधन प्रेरणा, विनम्रता और भावनाओं से भरा हुआ था, जिसने वहां मौजूद हर श्रोता के मन पर गहरी छाप छोड़ी।

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