Last Updated Feb - 12 - 2026, 03:46 PM | Source : Fela News
दुबई में 150 लोगों पर नई स्मार्टवॉच टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग शुरू हुई है, जो ब्लड ग्लूकोज लेवल के आधार पर डायबिटीज के खतरे का आकलन करने का दावा करती है।
दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे डायबिटीज के मामलों के बीच अब टेक्नोलॉजी इस गंभीर बीमारी की शुरुआती पहचान में बड़ी भूमिका निभा सकती है। दुबई में आयोजित वर्ल्ड हेल्थ एक्सपो (WHX) 2026 के दौरान एक ऐसी स्मार्टवॉच की टेस्टिंग की घोषणा की गई है, जो डायबिटीज के जोखिम का अनुमान लगाने में मदद कर सकती है। यह पहल हेल्थ टेक्नोलॉजी और मेडिकल रिसर्च के मेल का एक अहम उदाहरण मानी जा रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस स्टडी के तहत 150 प्रतिभागियों पर Huawei Watch GT 6 Pro को टेस्ट किया जाएगा। रिसर्च का उद्देश्य यह जांचना है कि क्या यह स्मार्टवॉच बढ़े हुए ब्लड ग्लूकोज स्तर के संकेतों को पहचानने में सक्षम है और कितनी सटीकता के साथ संभावित डायबिटीज रिस्क का आकलन कर सकती है।
किन लोगों पर होगा परीक्षण?
इस ट्रायल में तीन अलग-अलग समूह शामिल किए गए हैं।
• 50 पूरी तरह स्वस्थ वॉलंटियर्स
• 50 पहले से डायबिटीज से पीड़ित मरीज
50 प्री-डायबिटीज श्रेणी के लोग
प्री-डायबिटीज ग्रुप पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि यह वह चरण होता है जब ब्लड शुगर सामान्य से थोड़ा अधिक रहता है लेकिन अभी पूर्ण रूप से डायबिटीज घोषित नहीं होती। इस स्तर पर समय रहते पहचान हो जाए तो बीमारी को रोका या नियंत्रित किया जा सकता है।
कैसे काम करेगी यह तकनीक ?
स्मार्टवॉच शरीर से जुड़े विभिन्न बायोमेट्रिक डेटा जैसे हार्ट रेट वेरिएबिलिटी, ब्लड ऑक्सीजन, एक्टिविटी पैटर्न और अन्य शारीरिक संकेतों का विश्लेषण करती है। इन डेटा पॉइंट्स के आधार पर एल्गोरिद्म संभावित मेटाबॉलिक बदलावों का आकलन करता है, जो बढ़ते ब्लड शुगर से जुड़े हो सकते हैं।
हालांकि, यह ध्यान देना जरूरी है कि यह डिवाइस सीधे खून की जांच नहीं करती। स्टडी के दौरान इसकी रीडिंग की तुलना पारंपरिक कैपिलरी ग्लूकोज टेस्ट से की जाएगी, जिसमें उंगली से रक्त की एक बूंद लेकर शुगर लेवल मापा जाता है। इससे यह पता चलेगा कि स्मार्टवॉच की भविष्यवाणी कितनी भरोसेमंद है।
क्यों जरूरी है ऐसी तकनीक ?
डायबिटीज को अक्सर "साइलेंट डिजीज" कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण कई बार स्पष्ट नहीं होते। विश्व स्तर पर लाखों लोग ऐसे हैं जिन्हें यह पता ही नहीं चलता कि उनका ब्लड शुगर लेवल बढ़ रहा है। समय पर पहचान न होने के कारण हृदय रोग, किडनी डैमेज और आंखों की समस्याएं जैसी जटिलताएं बढ़ जाती हैं।
ऐसे में यदि पहनने योग्य डिवाइस (Wearables) संभावित जोखिम के शुरुआती संकेत दे सकें, तो यह पब्लिक हेल्थ के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। इससे लोग समय रहते डॉक्टर से परामर्श ले सकते हैं और जीवनशैली में सुधार कर सकते हैं।
क्या यह भविष्य की दिशा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि हेल्थ मॉनिटरिंग का भविष्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वेयरेबल टेक्नोलॉजी के हाथ में है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष स्टडी के परिणामों पर निर्भर करेगा । यदि यह तकनीक सटीक साबित होती है, तो भविष्य में नियमित हेल्थ चेकअप के साथ-साथ स्मार्टवॉच भी शुरुआती डायबिटीज स्क्रीनिंग का एक महत्वपूर्ण उपकरण बन सकती है। दुबई में चल रही यह टेस्टिंग सिर्फ एक रिसर्च प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि डिजिटल हेल्थ की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में इसके नतीजे वैश्विक हेल्थ इंडस्ट्री को नई दिशा दे सकते हैं।
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