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क्या Google Chrome बिकेगा? जानें अरविंद श्रीनिवास ने 34.5 बिलियन डॉलर का ऑफर क्यों दिया

क्या Google Chrome बिकेगा? जानें अरविंद श्रीनिवास ने 34.5 बिलियन डॉलर का ऑफर क्यों दिया

Last Updated Aug - 13 - 2025, 05:02 PM | Source : Fela News

Perplexity AI ने सभी को चौंका दिया है. कंपनी के CEO अरविंद श्रीनिवास ने Google Chrome खरीदने के लिए 34.5 बिलियन डॉलर नकद का ऑफर दिया है.
क्या Google Chrome बिकेगा?
क्या Google Chrome बिकेगा?

Google Chrome: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप Perplexity AI ने टेक दुनिया को चौंका दिया है। कंपनी के सीईओ अरविंद श्रीनिवास ने गूगल क्रोम खरीदने के लिए 34.5 बिलियन डॉलर नकद का ऑफर दिया है, जबकि गूगल ने क्रोम बेचने का कोई ऐलान नहीं किया है। यह ऑफर Perplexity की मौजूदा वैल्यू (14 बिलियन डॉलर) से दोगुने से भी ज्यादा है। कंपनी का मकसद AI सर्च रेस में अपनी पकड़ मजबूत करना और क्रोम के करीब 3 अरब यूज़र्स तक सीधी पहुंच बनाना है।

कौन हैं अरविंद श्रीनिवास?

अरविंद श्रीनिवास, Perplexity AI के सह-संस्थापक और सीईओ हैं। भारतीय मूल के श्रीनिवास ने IIT मद्रास से 2017 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डुअल डिग्री ली और फिर कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की।

2022 में उन्होंने अपने तीन साथियों के साथ Perplexity AI शुरू की, जो अब तक Nvidia और SoftBank जैसे बड़े निवेशकों से करीब 1 अरब डॉलर जुटा चुकी है। उनकी वैल्यूएशन 14 बिलियन डॉलर है।

श्रीनिवास पहले OpenAI, Google और DeepMind में रिसर्च रोल्स में काम कर चुके हैं।

गूगल पर कानूनी दबाव

अमेरिका में गूगल पर सर्च मार्केट में एकाधिकार रखने के आरोप में मुकदमा चल रहा है। हाल ही में कोर्ट ने कहा कि गूगल का सर्च पर अनुचित कंट्रोल है, और क्रोम को बेचना प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का एक तरीका हो सकता है। हालांकि, गूगल ने इस फैसले को चुनौती देने का फैसला किया है और क्रोम बेचने के कोई संकेत नहीं दिए हैं।

फंडिंग और शर्तें

Perplexity का कहना है कि कई बड़े निवेश फंड इस डील को फाइनेंस करने के लिए तैयार हैं, लेकिन डिटेल सामने नहीं आई। सौदे की शर्तों में क्रोमियम कोड ओपन-सोर्स रखना, 2 साल में 3 बिलियन डॉलर का निवेश करना और डिफॉल्ट सर्च इंजन न बदलना शामिल है।

अन्य कंपनियों की दिलचस्पी

OpenAI और Yahoo ने भी क्रोम खरीदने में रुचि दिखाई थी। 2023 में OpenAI ने गूगल से ChatGPT के लिए सर्च API मांगी थी, लेकिन गूगल ने इसे मना कर दिया। फिलहाल OpenAI अपने चैटबॉट के लिए Microsoft Bing पर निर्भर है।

भविष्य अनिश्चित, दांव बड़ा

विशेषज्ञों का मानना है कि गूगल इतनी आसानी से क्रोम नहीं बेचेगा, क्योंकि यह सर्च और AI दोनों के लिए अहम है। क्रोम का डेटा गूगल के AI मॉडल को मजबूत करता है और AI-जनरेटेड सर्च जैसे फीचर्स को सपोर्ट करता है। लेकिन अगर अमेरिकी सरकार गूगल के एकाधिकार को तोड़ने में सफल होती है, तो क्रोम की डील टेक इंडस्ट्री का सबसे बड़ा गेम-चेंजर बन सकती है।

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