Last Updated Feb - 13 - 2026, 11:00 AM | Source : Fela News
साइबर क्राइम के बढ़ते खतरे के बीच पारंपरिक पासवर्ड अब सुरक्षित नहीं रहे। जानिए क्यों टेक कंपनियां पासकी को भविष्य की सबसे मजबूत और भरोसेमंद लॉगिन तकनीक मान रही
डिजिटल दौर में हमारी पहचान अब केवल नाम और दस्तावेजों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ईमेल, सोशल मीडिया, बैंकिंग ऐप्स और ऑनलाइन शॉपिंग अकाउंट्स से जुड़ी हुई है। ऐसे में साइबर सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। लंबे समय तक पासवर्ड ऑनलाइन सुरक्षा की पहली दीवार माने जाते रहे, लेकिन बढ़ते डेटा लीक और हैकिंग की घटनाओं ने इस दीवार को कमजोर साबित कर दिया है। अब टेक्नोलॉजी कंपनियां पासवर्ड की जगह पासकी (Passkey) को भविष्य का सुरक्षित विकल्प बता रही हैं।
दरअसल, पासवर्ड सिस्टम की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि लोग अक्सर आसान या एक ही पासवर्ड कई प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल कर लेते हैं। हैकर्स डेटा लीक के जरिए इन पासवर्ड्स को हासिल कर लेते हैं या फिशिंग अटैक के जरिए यूजर्स को झांसे में ले लेते हैं। ऐसे में अकाउंट हैक होना आसान हो जाता है। इसी समस्या का समाधान पासकी टेक्नोलॉजी के रूप में सामने आया है।
पासकी क्या है?
पासकी एक डिजिटल ऑथेंटिकेशन सिस्टम है, जो पब्लिक की और प्राइवेट की के कॉम्बिनेशन पर काम करता है। जब आप किसी वेबसाइट या ऐप पर पासकी सेट करते हैं, तो उस प्लेटफॉर्म पर आपकी पब्लिक की स्टोर होती है, जबकि प्राइवेट की आपके डिवाइस में सुरक्षित रहती है। लॉगिन के समय दोनों की का मिलान होता है और आपकी पहचान सत्यापित हो जाती है। खास बात यह है कि इसमें आपको कोई पासवर्ड याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती।
पासकी के फायदे
सबसे बड़ा फायदा यह है कि पासकी का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। यह किसी भी तरह के बूट-फोर्स अटैक या फिशिंग से काफी हद तक सुरक्षित रहती है। चूंकि प्राइवेट की कभी सर्वर पर स्टोर नहीं होती, इसलिए डेटा लीक होने पर भी हैकर्स उसे चुरा नहीं सकते। हर वेबसाइट के लिए अलग पासकी बनती है, जिससे एक प्लेटफॉर्म का खतरा दूसरे पर असर नहीं
दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां जैसे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और अमेजन अब पासकी को अपनाने लगी हैं। कई प्लेटफॉर्म्स पर पासवर्ड के बजाय बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन — जैसे फिंगरप्रिंट या फेस अनलॉक के जरिए लॉगिन की सुविधा दी जा रही है। यह न केवल सुरक्षित है, बल्कि उपयोग में भी आसान है।
क्या पासकी पूरी तरह सुरक्षित है?
—
कोई भी तकनीक 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं कही जा सकती, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि पासकी पारंपरिक पासवर्ड की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत है। यह यूजर की पहचान को डिवाइस लेवल पर सुरक्षित रखती है और अनधिकृत एक्सेस की संभावना कम करती है।
तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में साइबर सुरक्षा की नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में पासवर्ड पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। अगर आप अपने ऑनलाइन अकाउंट्स को ज्यादा सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो अब समय आ गया है कि पासवर्ड छोड़कर पासकी जैसी आधुनिक और सुरक्षित तकनीक को अपनाया जाए।
यह भी पढ़े